Breaking

नियम सभी पर लागू होते हैं, यहां तक ​​कि प्रधानमंत्री पर भी…लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पक्षपात के आरोपों पर दिया जवाब

Om Birla Lok Sabha statement: लोकसभा में हाल के दिनों में बढ़े राजनीतिक विवाद और पक्षपात के आरोपों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि संसद के नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वह साधारण सांसद हों या प्रधानमंत्री। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही संविधान और स्थापित नियमों के आधार पर संचालित होती है और अध्यक्ष के रूप में उनका कर्तव्य इन नियमों का निष्पक्ष पालन कराना है।

अध्यक्ष पद से हटाने के प्रस्ताव का जिक्र

सदन में अपने संबोधन के दौरान बिरला ने उस दिन का भी उल्लेख किया जब विपक्ष ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कहा कि उस दिन उन्होंने स्वयं सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए रखी थी, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब एक दिन पहले ही उन्हें हटाने की मांग वाला प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था और वह पुनः सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।

संसद के नियम सभी पर समान

विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बीच कि उन्हें बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता, बिरला ने कहा कि लोकसभा के नियम सभी पर लागू होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी पड़ती है।

अपने आधे घंटे से अधिक लंबे भाषण में उन्होंने कहा कि संसद एक ऐसी संस्था है जहां परंपराओं और नियमों का पालन करना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इन नियमों और प्रक्रियाओं की एक लंबी परंपरा रही है और उन्हें उसी विरासत के अनुसार काम करना होता है।

सभी सदस्यों को बोलने का अधिकार

ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा के हर सदस्य को निर्धारित नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि संसद देश के 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है और यहां सहमति और असहमति दोनों के लिए जगह है।

उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें इस महत्वपूर्ण पद पर भरोसा जताने के लिए वे सभी के प्रति आभारी हैं और आगे भी निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे।

नरवणे की किताब के मुद्दे पर टिप्पणी

अपने भाषण के दौरान बिरला ने परोक्ष रूप से उस विवाद का भी जिक्र किया जिसमें विपक्ष पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर चर्चा की मांग कर रहा था। यह किताब 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान हिंसा से जुड़ी घटनाओं पर आधारित बताई जा रही है।

बिरला ने कहा कि सदन में किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी है और कोई भी सदस्य नियमों से बाहर जाकर किसी विषय पर बोलने का विशेष अधिकार नहीं रखता।

सदन में हुई घटना का जिक्र

उन्होंने पिछले महीने की एक घटना का भी उल्लेख किया, जब कुछ महिला सांसदों ने सदन के बीच में आकर नारेबाजी की और प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचने की कोशिश की थी। बिरला ने कहा कि उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो सकती थी, इसलिए उन्होंने एहतियात के तौर पर प्रधानमंत्री से सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सदन की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी इसके लिए कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं, ताकि संसद की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

Yas Pal

Recent Posts

वंदे भारत चेयर कार का हाई-स्पीड ट्रायल पूरा, 180 की रफ्तार के बाद अब इन टेस्ट की बारी

Vande Bharat Chair Car: वंदे भारत ट्रेन के नए चेयर कार रेक ने हाई-स्पीड ट्रायल…

1 hour ago

मरीन ड्राइव पर बेकाबू कार ट्रक में घुसी, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत 4 लोगों की हुई मौत

jamshedpur Marine Drive Accident: झारखंड के जमशेदपुर में गुरुवार तड़के रफ्तार का कहर देखने को…

2 hours ago

IPL 2027 Auction Venue: अब गोवा पहुंचा IPL ऑक्शन, BCCI दिसंबर में करवाएगी खिलाड़ियों की नीलामी

IPL 2027 Auction: आईपीएल 2027 की नीलामी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय…

2 hours ago

क्या फिर भिड़ सकते हैं भारत-पाक? अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो का आया जवाब

India Pakistan Conflict: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद…

3 hours ago

एशियन गेम्स 2026: भारत की छठे दिन शानदार शुरुआत, बैक टू बैक 2 मेडल से बढ़ा तिरंगे का मान

Asian Games 2026 India Rowing: भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 में छठे दिन मेडल…

3 hours ago