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‘गाली देना कूल नहीं’ मनु भाकर का युवाओं को संदेश, भाषा को लेकर छेड़ी नई बहस

by | Aug 3, 2026 | Trending

Manu Bhaker Statement: भारत की युवा ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने युवाओं के बीच बढ़ती अभद्र भाषा और गाली-गलौज के चलन पर चिंता जताई है। उनके हालिया बयान ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक भाषा और संवाद की संस्कृति पर नई बहस को जन्म दे दिया है। मनु भाकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि व्यक्ति की भाषा उसके विचारों और व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें और संवाद में शालीनता बनाए रखें।

भाषा से झलकता है व्यक्तित्व

मनु भाकर ने अपने संदेश में कहा कि आज के दौर में कई लोग गाली-गलौज को आत्मविश्वास, बेबाकी या आधुनिक सोच का प्रतीक मानने लगे हैं, जबकि यह धारणा सही नहीं है। उनके अनुसार सम्मानजनक भाषा किसी भी व्यक्ति की परिपक्वता और संस्कारों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संवाद का उद्देश्य अपनी बात प्रभावी ढंग से रखना होना चाहिए, न कि अपमानजनक शब्दों के जरिए ध्यान आकर्षित करना।

सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श पर सवाल

मनु भाकर की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया पर तीखी भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणियां और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल के कुछ राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान भी सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल हुई भाषा को लेकर बहस देखने को मिली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने युवाओं की बोलचाल और अभिव्यक्ति के तरीके को काफी प्रभावित किया है। ऐसे में लोकप्रिय हस्तियों की ओर से आने वाले संदेश समाज में सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकते हैं।

बाद में दी सफाई

अपने बयान पर बढ़ती चर्चा के बीच मनु भाकर ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह को निशाना बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अभद्र भाषा का प्रयोग सामान्य होता जा रहा है और इसी चिंता के चलते उन्होंने यह मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, सभ्य और सम्मानजनक संवाद किसी भी स्वस्थ समाज की पहचान है और इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
मनु भाकर का बयान केवल भाषा की शुद्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवाद की संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर शब्दों का प्रभाव पहले से कहीं अधिक है, उनका संदेश युवाओं को सोच-समझकर अपनी बात रखने की प्रेरणा देता है।

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