Mallikarjun Kharge Statement
Mallikarjun Kharge Statement: कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा सियासी मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की है कि कांग्रेस 5 जनवरी से पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करेगी। इस अभियान का मकसद महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को कमजोर या खत्म करने के प्रयासों के खिलाफ जनता को संगठित करना है। इस अपील का समर्थन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी किया है।
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक के बाद खरगे ने बताया कि पार्टी ने मनरेगा को बचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब इस मुद्दे को संसद तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जनता के बीच जाकर सरकार के फैसलों का विरोध करेगी। खरगे ने साफ शब्दों में कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि संविधान से जुड़ा काम करने का अधिकार है। इसे कमजोर करना या खत्म करना गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के अधिकारों पर सीधा हमला है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर सुनियोजित हमला किया जा रहा है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की साजिश बताया। खरगे ने कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए खास वर्गों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
खरगे ने तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा था, और मनरेगा के मुद्दे पर भी वैसा ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को मनरेगा पर लिए गए फैसलों के राजनीतिक और सामाजिक नतीजे भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी अध्ययन, मूल्यांकन या राज्यों से चर्चा किए मनरेगा को कमजोर करने का फैसला किया, ठीक वैसे ही जैसे कृषि कानूनों के समय किया गया था।
खरगे ने कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार का दूरदर्शी कानून था, जिसकी सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई। इस योजना का प्रभाव इतना गहरा था कि इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना सिर्फ एक योजना को खत्म करना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों और काम करने के अधिकार का अपमान है।
खरगे ने कहा कि राहुल गांधी ने वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर कई तथ्य सामने रखे हैं। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के वोटरों के नाम हटने से रोकने के लिए पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता घर-घर जाकर निगरानी करेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की और कहा कि यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि क्रिसमस डे के आयोजनों पर कथित हमलों से सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब हुई है।
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद यह CWC की पहली बैठक थी। बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
कांग्रेस का दावा है कि ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित का आंदोलन होगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह अभियान सरकार पर कितना दबाव बना पाता है और क्या मनरेगा को लेकर देश में फिर से वैसा ही जनआंदोलन खड़ा होगा, जैसा कृषि कानूनों के समय देखा गया था।
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