Mossad Iran Former President Secret Operation: ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) से जुड़ा एक पुराना दावा फिर चर्चा में आ गया है। रिपोर्टों और दावों में कहा गया है कि मोसाद ने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए एक गुप्त अभियान चलाने की कोशिश की थी, जिसमें कथित तौर पर ईरान के एक पूर्व राष्ट्रपति को अपने पक्ष में करने का प्रयास शामिल था। हालांकि, ऐसे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें मुख्य रूप से खुफिया गतिविधियों से जुड़े विश्लेषणों और दावों के तौर पर देखा जाता है।
क्या है मोसाद से जुड़ा दावा
दावों के अनुसार, इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान की सत्ता संरचना को कमजोर करने और राजनीतिक बदलाव लाने के उद्देश्य से कुछ गुप्त गतिविधियां संचालित की थीं। इन दावों में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति का नाम भी जोड़ा गया है। कहा गया कि उन्हें कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा गया, जिसके जरिए ईरान की राजनीति में बदलाव लाने की कोशिश की जा सकती थी।
मध्य पूर्व की राजनीति में खुफिया एजेंसियों की भूमिका
मध्य पूर्व में खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। इजरायल की मोसाद, अमेरिका की CIA और अन्य देशों की एजेंसियां रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए कई गुप्त अभियानों के लिए जानी जाती हैं। ईरान और इजरायल के बीच वर्षों से परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।
ईरान-इजरायल संबंधों में पुराना तनाव
ईरान और इजरायल एक-दूसरे के प्रमुख विरोधी देशों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष के अलावा साइबर हमलों, खुफिया अभियानों और अप्रत्यक्ष टकराव की खबरें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में मोसाद से जुड़े किसी भी दावे को दोनों देशों के बीच चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में देखा जाता है।
क्या वास्तव में हुआ था
खुफिया अभियानों से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां सार्वजनिक नहीं होतीं और कई बार वर्षों बाद भी उनकी पूरी पुष्टि नहीं हो पाती। इसलिए किसी भी कथित ऑपरेशन को लेकर उपलब्ध जानकारी को सावधानी से समझना जरूरी होता है। फिलहाल पूर्व राष्ट्रपति को एजेंट बनाए जाने या तख्तापलट की योजना से जुड़े दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मोसाद और ईरान से जुड़ा यह दावा मध्य पूर्व की जटिल राजनीति और खुफिया गतिविधियों को फिर चर्चा में ले आया है। हालांकि, ऐसे मामलों में आधिकारिक प्रमाण और विश्वसनीय पुष्टि के बिना किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। ईरान-इजरायल के बीच तनाव के कारण इस तरह के मुद्दे अक्सर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित करते हैं।
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