NCERT Book Controversy
NCERT Book Controversy: NCRT की आठवीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले विवादित अंश पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि सिर्फ माफी मांगना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की सामग्री बच्चों तक पहुंचना गलत है और न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया और कहा कि जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, सुनवाई जारी रहेगी।
NCRT ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8 के लिए ‘Exploring Society: India and Beyond, Vol II’ नामक पुस्तक जारी की थी। इस किताब के चैप्टर 4: ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ (पेज 125-142) में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों का उल्लेख किया गया था। चैप्टर में लिखा गया था कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार और लंबित मामलों का भारी बोझ आम लोगों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच में बाधक बनता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या भी दी गई थी।
इस विवाद को गंभीर मानते हुए CJI सूर्यकांत ने स्वत: संज्ञान लिया। उन्होंने कहा-
“मैं किसी भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा। यह एक सोची-समझी कार्रवाई प्रतीत होती है।”
CJI की कड़ी फटकार के बाद NCERT ने आधी रात को बयान जारी किया।
NCERT ने कहा कि इस चैप्टर में अनजाने में अनुचित सामग्री और त्रुटि शामिल हो गई थी। संस्था ने स्पष्ट किया की-
यह गलती अनजाने में हुई।
न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है।
भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जाएगी।
संशोधित किताब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी आपत्ति जताई और किताब के वितरण पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए। NCERT ने तुरंत इसे लागू किया।
‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ चैप्टर न्यायालयों के पदानुक्रम, न्याय तक पहुंच, भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और जवाबदेही तंत्र के मुद्दों को शामिल करता है।
• सुप्रीम कोर्ट में 81,000, उच्च न्यायालयों में 62.40 लाख और जिला न्यायालयों में 4.70 करोड़ मामले लंबित बताए गए।
• शिकायत निवारण के लिए C-पीग्राम्स (CPGRAMS) प्रणाली का उल्लेख था।
• 2017-2021 के बीच इस तंत्र के जरिए 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
पाठ्यपुस्तक में भारत के पूर्व CJI बी. आर. गवई*का उल्लेख किया गया। उन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जनता का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई को विश्वास पुनर्स्थापित करने का मार्ग बताया।
NCERT की गलती, CJI की कड़ी फटकार और तुरंत सुधार ने इस विवाद को तेज कर दिया। अब संशोधित पुस्तक छात्रों को संविधान, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सही समझ देने के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
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