NASA ISRO Moon Base Program: अमेरिका चांद पर इंसानों की वापसी की तैयारी कर रहा है और इस बार भारत को भी अपने साथ जोड़ना चाहता है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 में बताया कि नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत भी चांद की सतह पर उसके साथ काम करे।
आर्टेमिस प्रोग्राम क्या है
नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम चांद पर इंसानों को फिर भेजने की योजना है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध करना, चांद पर लंबे समय तक मानव गतिविधियों की तैयारी करना और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए जरूरी जानकारी जुटाना है। भारत ने 2023 में आर्टेमिस अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए थे। अब इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता मिलने से दोनों देशों के बीच चांद की खोज को लेकर सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
निसार मिशन से अंतरिक्ष स्टेशन तक सहयोग
सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका के बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का जिक्र करते हुए निसार मिशन और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यात्रा को महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। नासा और इसरो ने मिलकर निसार उपग्रह तैयार किया था, जिसे 30 जुलाई 2025 को भारत के GSLV-F16 रॉकेट से लॉन्च किया गया। यह रडार की मदद से पृथ्वी की जमीन, बर्फ और पानी में होने वाले बदलावों का अध्ययन करता है। इससे भूकंप, बाढ़, भूस्खलन और ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को समझने में मदद मिल सकती है। वहीं, शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया। यह अनुभव भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग और डॉकिंग पर भी सहयोग
भारत और अमेरिका अब अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग, स्पेसक्राफ्ट डॉकिंग और अलग-अलग अंतरिक्ष प्रणालियों को एक साथ काम करने लायक बनाने जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स के लिए बढ़ेंगे मौके
सर्जियो गोर ने भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स के लिए अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने की बात भी कही। उन्होंने पिक्सल, गैलेक्सी, दिगंतरा, बेलाट्रिक्स, स्काईरूट और अग्निकुल जैसी कंपनियों का जिक्र किया। उनके अनुसार, अमेरिकी निवेशक भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों में रुचि ले रहे हैं। भारत और अमेरिका का अंतरिक्ष सहयोग अब सैटेलाइट और अंतरिक्ष स्टेशन से आगे बढ़कर चांद तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है। नासा की ओर से इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता इसी बढ़ती साझेदारी का अहम संकेत है।
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