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नेपाल में बाढ़ के बाद मंडरा रहा बीमारियों का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

Nepal Flood Disease Risk: नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही के बाद अब एक और बड़ी चिंता सामने आ रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में दूषित पानी, खराब साफ-सफाई और भीड़भाड़ के कारण कई संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी और भोजन से होने वाली बीमारियों के अलावा सांस से जुड़ी समस्याएं, त्वचा संक्रमण और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी भी लोगों को अपनी चपेट में ले सकती है।

बाढ़ के बाद क्यों बढ़ता है बीमारियों का खतरा

बाढ़ के दौरान गंदा पानी घरों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाता है। इससे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और दूसरे रोगाणु सक्रिय हो सकते हैं। राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ रहने से भी संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका रहती है। दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ. एल.एच. कुमार के अनुसार, बाढ़ के बाद एक साथ कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं। दूषित पानी में ई. कोलाई, रोटावायरस और नोरोवायरस जैसे रोगाणुओं का खतरा बढ़ जाता है।

दूषित पानी से इन बीमारियों का खतरा

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पानी और भोजन के सेवन से कई बीमारियां फैल सकती हैं। इनमें हेपेटाइटिस ए, एंटरिक फीवर, शिगेलोसिस और हैजा प्रमुख हैं। एंटरिक फीवर को आमतौर पर मियादी बुखार कहा जाता है। इसमें बुखार धीरे-धीरे बढ़ सकता है और पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। पेट दर्द, मरोड़, जी मिचलाना, उल्टी और दस्त इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में कब्ज की समस्या भी हो सकती है।

शिगेलोसिस और हैजा से भी खतरा

शिगेलोसिस भी दूषित पानी और भोजन से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें बुखार, सिरदर्द, बेचैनी, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, हैजा यानी कॉलेरा भी दूषित पानी के कारण फैल सकता है। इसमें गंभीर दस्त और शरीर में पानी की कमी होने का खतरा रहता है। बाढ़ के बाद साफ पानी की उपलब्धता प्रभावित होने पर इसका जोखिम और बढ़ सकता है।

लेप्टोस्पायरोसिस भी बन सकता है खतरा

बाढ़ के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी संक्रमित जानवरों के पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैल सकती है। बाढ़ के पानी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार और त्वचा पर दाने जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

त्वचा संक्रमण से भी रहें सावधान

बाढ़ के पानी के संपर्क में आने और चोट लगने के कारण त्वचा तथा शरीर के नरम ऊतकों में संक्रमण हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, स्ट्रेप्टोकोकस पाइोजेन्स और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा जैसे बैक्टीरिया संक्रमण की वजह बन सकते हैं। इसलिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को चोट या घाव को खुला छोड़ने से बचना चाहिए और दूषित पानी के संपर्क को कम से कम रखना चाहिए।

बाढ़ के बाद बीमारियों से कैसे बचें

बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

पीने के पानी की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसे कम से कम एक मिनट तक उबालकर इस्तेमाल करें।
खाना खाने और बनाने से पहले साबुन और साफ पानी से हाथ धोएं।
कच्चे और पके हुए भोजन को अलग-अलग रखें।
भोजन को सुरक्षित तापमान पर रखने की कोशिश करें।
बाढ़ के पानी के सीधे संपर्क से बचें, खासकर यदि शरीर पर कोई घाव हो।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी और स्वच्छ भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दें।

राहत कार्य के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी जरूरी

नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। बड़ी संख्या में लोगों की तलाश की जा रही है और कई इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे हालात में प्रभावित लोगों तक साफ पानी, सुरक्षित भोजन और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। बाढ़ के बाद संक्रमण फैलने का खतरा कई दिनों तक बना रह सकता है। इसलिए राहत कार्य के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए बीमारी की निगरानी और बचाव के उपाय करना भी बड़ी चुनौती होगी।

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