Monday, Aug 31

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नेपाल बाढ़: सुरंगों में फंसे 900 से ज्यादा मजदूर, त्रिशूली-3ए में बनाया रास्ता; ऑक्सीजन-खाना भेजा

Nepal: नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। सबसे बड़ी चुनौती ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को बाहर निकालना है। नेपाली सेना के मुताबिक, रविवार को करीब 90 सदस्यों वाली संयुक्त टीम सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंच गई। टीम में 66 सेना जवान, प्रशिक्षित कुत्तों के साथ विशेषज्ञ खोज एवं बचाव दल, 18 सशस्त्र पुलिसकर्मी और छह नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।

सुरंग तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग और नियंत्रित विस्फोट

रविवार दोपहर करीब 2 बजे बचावकर्मी सुरंग के ऊपरी हिस्से ‘क्राउन हेड’ तक पहुंचे और वहां करीब 2×3 फीट का रास्ता बनाया। रस्सियों के सहारे अंदर उतरकर लोगों को आवाज लगाई गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद भारी मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों से रास्ता चौड़ा करने का काम तेज किया गया। सुरंग में ऑक्सीजन पहुंचाने के साथ कैमरा भी भेजा गया है। अंदर फंसे लोगों तक खाना भी पहुंचाया गया, लेकिन अब तक किसी से संपर्क नहीं हो सका है। मलबे, तेज नदी और खराब मौसम के बीच बचावकर्मी लगातार सुरंग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता

आपदा के बाद नेपाल की अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता हैं। आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार इनमें 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी शामिल हैं। भारी मलबा, नदी का तेज बहाव और मौसम अभियान में बड़ी बाधा बने हुए हैं। बाढ़ से परियोजना तक जाने वाली सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण भारी उपकरण पहुंचाना मुश्किल हुआ। सेना ने एक्सकेवेटर और बुलडोजरों को हिस्सों में खोलकर हेलीकॉप्टर से नुवाकोट के बट्टार और फिर परियोजना स्थल तक पहुंचाया। ड्रिलिंग मशीन, एक्सकेवेटर और हाइड्रोलिक कटर से मलबा हटाया जा रहा है।

बारिश और बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई मुश्किल

शनिवार रात बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से खुदाई वाली जगह में पानी भर गया था। पानी कम होने के बाद ड्रिलिंग दोबारा शुरू की गई। सेना का कहना है कि कठिन हालात के बावजूद संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है।

नेपाल में 752 मौतें, 2,502 लोग लापता

प्राकृतिक आपदा में नेपाल में मृतकों की संख्या 752 पहुंच गई है, जबकि करीब 2,502 लोग अब भी लापता हैं। करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी राहत-बचाव में जुटे हैं और लगभग 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बुधवार को करीब 5,200 मीटर ऊंचाई पर ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर गिरा। चट्टान और मलबा लेंदे नदी में गिरने के बाद तेज सैलाब रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की ओर बढ़ा। त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट में करीब 9 मीटर बढ़ गया। शुरुआती तौर पर अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसे भूकंप से जोड़ने की बात कही थी, लेकिन बाद में पता चला कि दर्ज भूकंपीय संकेत खुद भूस्खलन से पैदा हुआ था।

तिब्बत में भी भारी नुकसान

चीन के तिब्बत क्षेत्र में कम से कम 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की सूचना है। लापता लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक हैं, जिनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।

भारत समेत कई देशों से मदद

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं। अमेरिका और कनाडा ने 3.6-3.6 मिलियन डॉलर, ब्रिटेन ने करीब 6.8 मिलियन डॉलर, संयुक्त राष्ट्र ने 2.5 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ ने करीब 2.3 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता घोषित की है। नेपाल ने विशेषज्ञ बचाव मदद के लिए भारत और चीन से भी सहयोग मांगा है। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने पर है।

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