नेपाल में बाढ़ और मलबे के बीच कई दिनों तक फंसे लोगों के जिंदा बचने की घटनाओं ने सभी को हैरान कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कोई इंसान बिना भोजन और पानी के कितने समय तक जीवित रह सकता है? विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और परिस्थितियां अलग होती हैं।
हाल ही में नेपाल के बेट्रावती इलाके में ढही एक इमारत के मलबे से 64 वर्षीय चंद्रिका कुमारी श्रेष्ठा को करीब 11 दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया। बचाव दल को वह मलबे के अंदर बनी एक छोटी-सी खाली जगह में मिलीं। इसी तरह हाइड्रोपावर की सुरंगों में फंसे कुछ लोगों को भी कई दिनों के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
बिना भोजन और पानी के शरीर कैसे करता है मुकाबला?
वैज्ञानिकों के अनुसार, भोजन और पानी की कमी का शरीर पर असर एक जैसा नहीं होता। खाना उपलब्ध न होने पर शरीर के पास पहले से जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करने का विकल्प रहता है। इसके कारण इंसान कुछ समय तक बिना भोजन के भी अपनी जरूरी शारीरिक गतिविधियां जारी रख सकता है।
वहीं पानी की कमी कहीं ज्यादा तेजी से शरीर को प्रभावित करती है। शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर डिहाइड्रेशन बढ़ने लगता है और कई महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से यह तय करना मुश्किल है कि कोई व्यक्ति बिना खाना या पानी के कितने दिनों तक जीवित रह सकता है। उसकी उम्र, स्वास्थ्य, शरीर में मौजूद वसा और पानी, तापमान, चोट की स्थिति और आसपास के वातावरण जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं।
खाना नहीं मिलने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
जब शरीर को भोजन से ऊर्जा मिलना बंद हो जाती है तो वह अपनी जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। मेडिकल जानकारी के अनुसार, शुरुआती दौर में शरीर लीवर में मौजूद ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करता है। यह ऊर्जा का ऐसा स्रोत है जिसे शरीर आसानी से उपयोग कर सकता है।
लगभग 24 घंटे के बाद ग्लाइकोजन का भंडार काफी कम होने लगता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए जमा वसा का इस्तेमाल बढ़ा देता है।
अगर लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर ऊर्जा बनाने के लिए मांसपेशियों में मौजूद प्रोटीन का इस्तेमाल भी शुरू कर सकता है। इससे व्यक्ति की ताकत कम होने लगती है और मांसपेशियों का नुकसान बढ़ सकता है।
मलबे में फंसे लोग कैसे बच जाते हैं?
किसी व्यक्ति के मलबे में फंसने के बाद उसके आसपास की परिस्थितियां बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। अगर मलबे के बीच सांस लेने के लिए पर्याप्त हवा मौजूद हो और व्यक्ति को गंभीर चोट न लगी हो, तो उसके कुछ समय तक जीवित रहने की संभावना बनी रह सकती है।
मलबे के अंदर बनी छोटी-सी खाली जगह भी जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसी जगह व्यक्ति को दबाव से बचा सकती है और उसे सांस लेने के लिए कुछ जगह मिल सकती है। तापमान, शरीर की शुरुआती स्थिति और पानी की उपलब्धता भी उसके बचने की संभावना को प्रभावित करती है।
हालांकि, लंबे समय तक भोजन और पानी न मिलना बेहद खतरनाक स्थिति है। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए यह निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है कि वह मलबे में कितने दिनों तक जीवित रह सकता है। हर बचाव का मामला उसकी परिस्थितियों और शरीर की क्षमता पर निर्भर करता है।

