Bihar political news: बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ी हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री के रूप में अपने रिकॉर्ड दसवें कार्यकाल की शपथ ली थी और उस शपथ ग्रहण को अभी चार महीने ही हुए हैं। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि वे राज्यसभा जाते हैं तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
नीतीश कुमार ने पटना में बिहार विधानसभा परिसर में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ अमित शाह, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के कई अन्य नेता मौजूद रहे। इस मौके ने राजनीतिक रूप से खास महत्व हासिल कर लिया, क्योंकि इसे केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं बल्कि संभावित राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नामांकन से पहले नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के लिए एक संदेश जारी किया। उन्होंने लोगों को वर्षों से मिले समर्थन और विश्वास के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे ने ही उन्हें दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की सेवा करने का अवसर दिया।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधानसभा के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने का निर्णय लिया है।
नामांकन से पहले जेडीयू के भीतर भी गतिविधियां तेज रहीं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने देर रात तक बैठकें कीं। यह बैठकें पार्टी नेता संजय झा के आवास पर आयोजित हुईं, जहां आधी रात के बाद भी नेताओं का आना-जाना जारी रहा। इन बंद कमरे की बैठकों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि पार्टी बिहार में नई राजनीतिक रणनीति और संभावित नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है।
बिहार में इस समय राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख गुरुवार थी। भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के रूप में नितिन नबीन और शिवेश कुमार को मैदान में उतारा है। इसके अलावा एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी गठबंधन के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं जेडीयू की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को दूसरा उम्मीदवार बनाया गया है और वे भी नामांकन दाखिल करने वाले हैं।
विपक्षी दल आरजेडी भी इस चुनाव में अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, पांचवीं सीट के लिए भी उम्मीदवार उतारा जा सकता है, जिससे मुकाबला काफी कड़ा हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर होने वाला मुकाबला राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को और दिलचस्प बना सकता है।
जेडीयू सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार कम से कम 16 मार्च तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, क्योंकि उसी दिन राज्यसभा के लिए मतदान होना है। यदि वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो जाते हैं, तो यह उनके लंबे राजनीतिक करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
नीतीश कुमार इससे पहले बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। यदि वे राज्यसभा में प्रवेश करते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जो राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं।
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