Monday, Aug 31

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रोज नहीं करते स्मोकिंग, फिर भी हो सकता है मुंह का कैंसर? जानें डॉक्टर की राय

Occasional Smoking Mouth Cancer Risk: मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बड़ी चिंता बना हुआ है। बीड़ी-सिगरेट के अलावा गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। कई लोग मानते हैं कि अगर वे रोज धूम्रपान नहीं करते और कभी-कभार ही बीड़ी या सिगरेट पीते हैं, तो इससे ज्यादा नुकसान नहीं होगा। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान की कोई ऐसी सुरक्षित मात्रा तय नहीं है, जिसे कैंसर के जोखिम से पूरी तरह मुक्त माना जा सके।

‘सोशल स्मोकिंग’ को भी न समझें सुरक्षित

दिल्ली के अपोलो अस्पताल के सिर और गर्दन कैंसर विभाग के डॉ. अक्षत मलिक के अनुसार, युवाओं में दोस्तों के साथ कभी-कभार धूम्रपान करने की आदत को अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसे ‘सोशल स्मोकिंग’ कहा जाता है। लेकिन कभी-कभार धूम्रपान को भी सुरक्षित मानना सही नहीं है। डॉक्टर के मुताबिक, पिछले एक दशक में देश में मुंह के कैंसर के मामले बढ़े हैं और चिंता की बात यह है कि कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। युवाओं में कम उम्र से धूम्रपान और तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

शराब के साथ तंबाकू का सेवन बढ़ा सकता है जोखिम

कुछ लोग शराब के साथ बीड़ी या सिगरेट का सेवन करते हैं। ऐसे में जोखिम और बढ़ सकता है। इसलिए धूम्रपान के साथ शराब या अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन से बचना जरूरी है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

मुंह में होने वाले कुछ बदलाव गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। खासकर इन लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए:

मुंह का ऐसा छाला जो दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो
मुंह में सफेद या लाल रंग का पैच
मुंह खोलने या खाना चबाने में परेशानी
खाना खाते समय लगातार जलन या दर्द
जीभ या मुंह के किसी हिस्से में गांठ
तंबाकू छोड़ना सबसे बेहतर बचाव

डॉ. अक्षत मलिक के मुताबिक, कभी-कभार धूम्रपान करने वालों को भी इसे छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। बीड़ी-सिगरेट के साथ गुटखा, खैनी, जर्दा या किसी अन्य रूप में तंबाकू का सेवन भी छोड़ना जरूरी है। अगर तंबाकू छोड़ने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर की मदद ली जा सकती है। चिकित्सकीय सलाह, दवाओं और व्यवहार संबंधी उपचार की मदद से इस आदत को छोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

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