Ganesh Chaturthi 2025
Ganesh Chaturthi : हर साल की तरह इस बार भी गणेश भक्त बप्पा के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश प्राकट हुए थे, इसलिए इस पर्व को विशेष रूप से शुभ और मंगलकारी माना जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक और देश के कई हिस्सों में यह त्योहार पूरे उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है।
भगवान गणेश को बाधाओं के विनाशक और प्रथम पूज्य कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करने की परंपरा है। भजन में भी उल्लेख है “गणानां त्वा गणपतिं हवामहे” अर्थात हम गणों के अधिपति गणेश की आराधना करते हैं।
इस पर्व के दौरान भक्तजन गणेश प्रतिमा को घर या सार्वजनिक पंडाल में स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक विशेष पूजन, अर्चन, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। 10वें दिन अनंत चतुर्दशी को बप्पा का विसर्जन किया जाता है।
पंचांग के अनुसार, साल 2025 में गणेश चतुर्थी की शुरुआत 26 अगस्त, मंगलवार को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट से होगी और यह तिथि 27 अगस्त, बुधवार दोपहर 3 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि को मानने की परंपरा के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025 (बुधवार) को मनाया जाएगा। हालांकि, व्रत करने वालों के लिए उपवास की तिथि 26 अगस्त (मंगलवार) होगी, क्योंकि इस दिन रात्रि में चंद्र दर्शन और पूजन का विधान है।
भक्त मानते हैं कि गणेश प्रतिमा की स्थापना के साथ स्वयं बप्पा घर में पधारते हैं और दस दिनों तक सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार करते हैं। इन दिनों घर-घर और पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पूजा-पाठ और आरती का आयोजन होता है और नए-नए प्रकार के भोग लगाए जाते है। भक्त गणेश को मोदक, लड्डू अर्पित करते है, जो उनके प्रिय भोग है।
गणेश प्रतिमा का विसर्जन परंपरा और संकल्प के अनुसार किया जाता है। कोई 1.5, 3, 5, 7 दिन में बप्पा को विदा करता है, जबकि कई जगह अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी (10वें दिन) पर ही विसर्जन होता है। विसर्जन के समय “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयघोष गूंजता है।
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इस साल Ganesh Chaturthi का पर्व और भी खास है क्योंकि इस दिन 5 शुभ योग बन रहे हैं, जो इसे अत्यंत मंगलकारी बना रहे हैं। लक्ष्मी नारायण योग बुध और शुक्र की युति से बन रहा है। इसी के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। जो गणेशजी की तरह सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला। इसके अलावा चतुर्थी रवि योग, शुभ योग और शुक्ल योग भी बन रहा है। इन योगों में गणपति की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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