Opposition Strategy: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन विपक्ष ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार को चौंका दिया। पहले विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की मांग करने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अचानक उन्होंने अपना ध्यान मध्य पूर्व में जारी युद्ध और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर मोड़ दिया।
सत्र की शुरुआत ही विपक्षी सांसदों के जोरदार विरोध और नारेबाजी से हुई। उस समय विदेश मंत्री एस जयशंकर संसद में स्थिति पर बयान दे रहे थे। विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर खड़े हो गए और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और तेल की कीमतों में उछाल पर चर्चा की मांग करने लगे।
विपक्ष के विरोध के कारण राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष चाहता था कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और उसके आर्थिक तथा मानवीय प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हो, लेकिन सरकार ने औपचारिक बहस की मांग को स्वीकार नहीं किया।
लोकसभा में भी स्थिति लगभग यही रही और दोपहर 3 बजे तक कार्यवाही बाधित रही। विपक्ष का कहना था कि यह मुद्दा केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं का भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है और इसका असर शेयर बाजार में भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए क्योंकि यह देश से जुड़ा सार्वजनिक मुद्दा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष से जुड़े मुद्दे पर चर्चा बाद में की जा सकती है।
सरकार की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष अपने ही प्रस्तावों पर चर्चा से बच रहा है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कहा कि विपक्ष ने अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाकर खुद ही बहस से दूरी बना ली।
सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव सोमवार सुबह हुई एक बैठक के बाद किया गया, जिसमें राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। इस बैठक में तय किया गया कि संसद में प्राथमिकता मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और उसके प्रभावों को दी जाएगी।
इस फैसले के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि महाभियोग प्रस्ताव को पारित कराने के लिए विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी। हालांकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष का समर्थन करने की बात कही थी, फिर भी संख्या बल पर्याप्त नहीं माना जा रहा था।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर भारत में चिंता बढ़ गई है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। इजरायल द्वारा ईरानी तेल ठिकानों पर हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो पिछले चार वर्षों में पहली बार हुआ है। इससे भारत में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सरकार ने कहा है कि देश के पास पर्याप्त पेट्रोलियम भंडार है और जरूरत पड़ने पर रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। साथ ही सरकार ने मध्य पूर्व से भारतीय नागरिकों को वापस लाने का अभियान भी शुरू कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 मार्च से अब तक 52,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। हालांकि अभी भी लाखों भारतीय उस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, संसद के दूसरे दिन फिर से लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिरिजू इस बहस की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।
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