Friday, Sep 11

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Packed Food Warning Label: पैक्ड फूड में ज्यादा चीनी-नमक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राष्ट्रीय हित का बताया मुद्दा

नई दिल्ली: पैक्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल यानी FoPL से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि कोर्ट इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है और इसे राष्ट्रीय हित का मामला मानता है। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस संबंध में अपना आदेश जारी करेगी। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

कोर्ट ने कहा- स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को लेकर उसकी चिंता है। खास तौर पर बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य पर पैक्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के प्रभाव को लेकर अदालत ने गंभीर रुख अपनाया।

पीठ ने कहा कि इस मामले पर कोर्ट ने अपना होमवर्क किया है और संबंधित पक्षों को जारी होने वाले आदेश का अध्ययन करने के लिए कहा गया है। आदेश को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की संभावना है।

अदालत ने सभी पक्षों से अगली सुनवाई पर आदेश के आधार पर अपनी बात रखने को कहा है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर ज्यादा सख्त चेतावनी की मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने सुनवाई के दौरान अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

उन्होंने दलील दी कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की तुलना अंडे या नमकीन काजू जैसे पोषण वाले खाद्य पदार्थों से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने ऐसे उत्पादों के लिए ज्यादा प्रभावी और स्पष्ट चेतावनी लेबल की जरूरत बताई।

कामत ने पैकेट पर चेतावनी के लिए लाल रंग के अलावा किसी अन्य रंग पर भी विचार करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने इस सुझाव को संज्ञान में लिया।

FSSAI ने दिया फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल का प्रस्ताव

इस मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने अदालत के सामने अनुपालन हलफनामा दाखिल किया है। इसमें पैक्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे खाद्य उत्पादों के पैकेट के सामने प्रमुखता से चेतावनी चिह्न लगाने की बात कही गई है, जिनमें तय सीमा से ज्यादा मात्रा में कुछ पोषक तत्व मौजूद हों।

प्रस्तावित चेतावनियों में शामिल हैं:

  • HIGH FAT
  • HIGH SALT
  • HIGH SUGAR
  • HIGHLY SWEETENED BEVERAGE

दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

पहले चरण में ऐसे उत्पादों को दायरे में लाने का प्रस्ताव है, जिनमें एडेड फैट, एडेड शुगर और नमक में से कम से कम दो तत्व निर्धारित सीमा से ज्यादा पाए जाते हैं।

इसके बाद दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले उत्पादों को भी चेतावनी व्यवस्था के तहत लाने का प्रस्ताव है।

FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों में जरूरी संशोधन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद व्यवस्था लागू की जाएगी।

घी, तेल और चीनी जैसे उत्पादों को छूट

प्रस्ताव में कुछ एकल-सामग्री वाले उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है। इनमें घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं।

यानी पैकेट पर प्रस्तावित चेतावनी व्यवस्था मुख्य रूप से उन खाद्य उत्पादों को ध्यान में रखती है जिनमें कई सामग्री शामिल होती हैं और जिनमें चीनी, नमक या वसा की मात्रा अधिक हो सकती है।

28 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख तय की है। अदालत ने सभी पक्षों को जारी होने वाले आदेश को पढ़कर अगली सुनवाई में आने को कहा है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि पैक्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर आगे की नियामकीय प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।