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400 साल पुराना शाही महल, जहां आज भी छिपे हैं कई रहस्य; जानिए पद्मनाभपुरम पैलेस की कहानी

by | Jun 26, 2026 | Others

Padmanabhapuram Palace: भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित पद्मनाभपुरम पैलेस ऐसा शाही महल है, जहां प्रवेश करते ही सदियों पुराना इतिहास जीवंत महसूस होता है। यह महल अपनी गुप्त भूमिगत सुरंगों, प्राचीन पेंटिंग्स और शानदार लकड़ी की नक्काशी के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

1601 में बनी थी राजधानी

इस महल का इतिहास 1601 से जुड़ा है, जब यह वेनाड साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। बाद में 1750 में महाराजा मार्तंड वर्मा ने अपना राज्य भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया और राजधानी का नाम पद्मनाभपुरम रखा, जिसका अर्थ है "भगवान पद्मनाभ का निवास"

रहस्यमयी फर्श और गुप्त सुरंग

महल का फर्श आज भी कांच की तरह चमकता है, जो इतिहासकारों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। माना जाता है कि इसे बनाने में कोयला, चूना, जले हुए नारियल के छिलके और पौधों के रस का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसकी वास्तविक निर्माण तकनीक का कोई लिखित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

महल का सबसे पुराना हिस्सा राजमाता का महल है। यहां पारंपरिक आंगन के चारों ओर बारीक लकड़ी की नक्काशी देखने को मिलती है। इसी हिस्से में एक गुप्त भूमिगत सुरंग भी है, जिसका उपयोग राजा और शाही परिवार संकट के समय सुरक्षित निकलने के लिए करते थे।

बिना एसी के रहता था ठंडा

राजा का बैठक कक्ष (मीटिंग रूम) इस तरह बनाया गया था कि भीषण गर्मी में भी अंदर प्राकृतिक रूप से ठंडक बनी रहती थी। इसकी लकड़ी की झरोखेदार खिड़कियां तेज धूप को रोकती थीं, जबकि ठंडी हवा को भीतर आने देती थीं।

हजारों मेहमानों के लिए था डाइनिंग हॉल

महल का विशाल डाइनिंग हॉल त्रावणकोर के राजाओं की समृद्धि और मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। शाही समारोहों के दौरान यहां एक साथ हजारों मेहमानों को भोजन परोसा जाता था, जो उस दौर की भव्यता और संपन्नता को दर्शाता है।

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