pakistan on ayodhya
भारत के अयोध्या में बने राम मंदिर पर झंडा फहराए जाने से पाकिस्तान बौखला उठा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर भारत में इस्लामोफोबिया के बढ़ने का खुला आरोप लगाया और ऐतिहासिक जगहों की कथित बेअदबी का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हुआ है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि हिंदू पक्ष को सौंपने का आदेश दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मंगलवार 25 नवम्बर को मंदिर की धर्म ध्वजा को फहराया गया, जो किसी भी हिंदू मंदिर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंगलवार को राम मंदिर पर धर्मध्वज फहराने की तस्वीरें पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी शेयर कीं। इस पूरे कार्यक्रम को देख पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और इसे भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव वाला रवैया बता रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह नया कदम भारत में अल्पसंख्यकों पर दबाव के एक बड़े पैटर्न और ज्यादातर हिंदुत्व सोच के असर में मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश को दिखाता है।
बयान में कहा है गया कि कई दूसरी ऐतिहासिक मस्जिदें अब बेअदबी या गिराए जाने के ऐसे ही खतरों का सामना कर रही हैं, जबकि भारतीय मुसलमान लगातार बढ़ते सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने का सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पाकस्तानी विदेश मंत्रालय ने तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगा डाली है कि वह 'भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया, हेट स्पीच और नफरत से प्रेरित हमलों पर ध्यान दे।'
बयान के आखिर में पाकिस्तान ने भारत सरकार से अपील की है कि वह मुसलमानों समेत सभी अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करके और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार की जिम्मेदारियों के अनुसार उनके पूजा स्थलों की रक्षा करे और अपनी जिम्मेदारियों को निभाए। दिलचस्प बात है कि भारत को अल्पसंख्यों पर ज्ञान देने वाले पाकिस्तान के अपने देश में उनकी हालत लगातार बेहाल होती जा रही है। पाकिस्तान में लगातार ईसाई और हिंदू लड़कियों के ज़बरन धर्म परिवर्तन की आ रही रिपोर्ट विचलित करने वाली है।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा ऐसा देश जिसपर खुद अपने अल्पसंख्यकों के दमन, कट्टरता और व्यवस्थित बुरे बर्ताव का गहरा दागदार रिकॉर्ड है। उस पाकिस्तान के पास दूसरों को लेक्चर देने का कोई नैतिक आधार नहीं है। खोखले उपदेश देने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने अंदर झांके और अपने गिरते मानवाधिकार रिकॉर्ड पर ध्यान दे।
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