Windfall Tax Cut: वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। इस फैसले का सीधा संबंध निर्यात किए जाने वाले ईंधन से है। हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों या इन पर लगने वाले मौजूदा उत्पाद शुल्क में इस फैसले से कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दुनिया के ऊर्जा बाजार में कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विंडफॉल टैक्स को सरकार उन कंपनियों के असाधारण लाभ पर लगाए जाने वाले कर के तौर पर इस्तेमाल करती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अतिरिक्त मुनाफा कमाती हैं। सरकार बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इस टैक्स की दर में बदलाव करती रहती है।
सरकार के इस फैसले को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि केवल विंडफॉल टैक्स में कटौती के आधार पर देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल कमी की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं।
देश में 15 अगस्त तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई थी। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद प्रमुख शहरों में ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। दिल्ली समेत कई शहरों में उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के लिए पहले की तरह ही कीमत चुकानी पड़ रही है। इसलिए सरकार द्वारा निर्यात पर विंडफॉल टैक्स घटाने का असर घरेलू पंप कीमतों पर सीधे तौर पर दिखाई नहीं देता।
विमानन क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) को लेकर भी सरकार ने टैक्स में बदलाव किया है। ATF की कीमतों का असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ता है, लेकिन इस फैसले का प्रभाव किस स्तर तक पड़ेगा, यह अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों और कंपनियों की लागत संरचना समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा घरेलू पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं को मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि घरेलू ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े कर ढांचे में बदलाव है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को राहत देने की दिशा में उठाया गया है, जबकि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कर व्यवस्था को फिलहाल बरकरार रखा गया है।
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