Saturday, Oct 24

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EU के कार्बन टैक्स पर पीयूष गोयल ने उठाया सवाल, कहा- कार्बन टैक्स लगाकर खुद की मुश्किलें बढ़ा रहे विकसित देश

Piyush Goyal EU Carbon Tax: यूरोपीय संघ (EU) की कार्बन टैक्स नीति पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस्पात उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाने और नए नियमों व प्रतिबंधों के जरिए यूरोप खुद अपनी आर्थिक संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहा है। गोयल के मुताबिक, इन नियमों से स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है, जिसका असर उद्योगों के साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

कार्बन टैक्स से यूरोप में बढ़ सकती है महंगाई: गोयल

पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) लागू करने के साथ इस्पात आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी नीतियों से यूरोप में जीवन-यापन की लागत बढ़ सकती है। गोयल ने आरोप लगाया कि EU नए नियमों और मानकों के जरिए खुद के लिए कृत्रिम बाधाएं खड़ी कर रहा है। उन्होंने कहा कि खासकर इस्पात उद्योग को संरक्षण देने के लिए लागू किए जा रहे ये कदम अंततः यूरोपीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ज्यादा नियमों से उद्योगों पर बढ़ेगा बोझ: गोयल

पीयूष गोयल ने कहा कि कार्बन टैक्स और अन्य नियमों की लागत से स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट महंगे होंगे। इसका असर बंदरगाहों, हवाई अड्डों, राजमार्गों और जलापूर्ति जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय संघ लगातार नए नियम जोड़कर अपने उद्योगों पर बोझ बढ़ा रहा है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी। गोयल के मुताबिक, इन नियमों से दूसरे देशों के साथ व्यापार में भी गैर-शुल्क बाधाएं पैदा हो सकती हैं।

'कार्बन उत्सर्जन पर विकसित देशों को घेरा'

गोयल ने कहा कि भारत की आबादी दुनिया की करीब 17% है, लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उसका योगदान 3% से भी कम है। उन्होंने विकसित देशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले सस्ती ऊर्जा के सहारे आर्थिक विकास किया, लेकिन अब विकासशील देशों पर पर्यावरण संबंधी नियमों का बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण के उन वादों को भी पूरा करने की जरूरत बताई, जो विकसित देशों ने विकासशील देशों से किए थे।

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