PM Modi Energy Crisis: राजस्थान की बहुप्रतीक्षित रिफाइनरी परियोजना का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुए 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से भारत समय पर लिए गए फैसलों, रणनीतिक योजना और मजबूत कूटनीति के दम पर सफलतापूर्वक उबर गया। उन्होंने कहा कि जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संकट से जूझ रही थीं, तब भारत ने हर स्तर पर सही निर्णय लेकर अपने नागरिकों को ईंधन संकट से बचाया।
'भारत ने 7 दिन में संभाला LPG संकट'
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग संकट के दौरान अफवाहें फैलाने और डर का माहौल बनाने में लगे थे, जबकि सरकार निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी थी। उन्होंने कहा कि इस दौरान किए गए कार्य, धैर्य, संवेदनशील नीतियां और कूटनीतिक प्रयास इतिहास में दर्ज होंगे।
मोदी ने बताया कि भारत अपनी लगभग 60% LPG आवश्यकता आयात से पूरी करता है। पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बड़ा ऊर्जा संकट पैदा होने का खतरा था, लेकिन भारत ने कूटनीतिक संबंधों के दम पर लगभग 40 देशों से ईंधन की व्यवस्था की। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने केवल 7 दिनों में LPG संकट को संभाल लिया, जबकि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के बावजूद देश में LPG की आपूर्ति बाधित नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि हाल में वाणिज्यिक LPG सिलेंडरों की कीमतों में बड़ी कटौती की गई और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसका भार सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए स्वयं उठाया।
रिफाइनरी, आत्मनिर्भरता और कांग्रेस पर निशाना
प्रधानमंत्री ने राजस्थान रिफाइनरी को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रहता है जब वह आत्मनिर्भर बने। उन्होंने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन किया और कहा कि इसकी आधुनिक सुविधाएं सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि 2018 से 2023 तक राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान रिफाइनरी परियोजना रुकी रही, जबकि भाजपा की 'डबल इंजन सरकार' बनने के बाद काम तेज हुआ। उन्होंने कहा, "जिस परियोजना का शिलान्यास मैं करता हूं, उसका उद्घाटन भी मैं ही करता हूं।" साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत की असफलता की भविष्यवाणी करने वाले आज निराशा में हैं, जबकि देश ने निर्णायक नेतृत्व, कूटनीति और आत्मनिर्भरता के बल पर अपनी क्षमता साबित की है।
ये भी देखे: भारत के E20 पेट्रोल प्रस्ताव को भूटान ने क्यों ठुकराया?

