PM Modi Manish Tewari Meeting: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले चंडीगढ़ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की मुलाकात राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों नेताओं ने मंच पर हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। इस मुलाकात का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक इस मुलाकात को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई राजनीतिक बयान या विशेष टिप्पणी सामने नहीं आई है।
कार्यक्रम के मंच पर साथ दिखे दोनों नेता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चंडीगढ़ पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और जनसभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
पीएम मोदी और मनीष तिवारी की मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे सामान्य शिष्टाचार की मुलाकात बता रहे हैं, जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसके समय और राजनीतिक माहौल को देखते हुए अलग-अलग तरह के अनुमान लगा रहे हैं।
मानसून सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इससे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। ऐसे समय में अलग-अलग दलों के नेताओं की मुलाकातें स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती हैं। हालांकि, सार्वजनिक कार्यक्रमों में विभिन्न दलों के नेताओं का एक-दूसरे से मिलना और औपचारिक बातचीत करना भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
अब तक नहीं आया कोई आधिकारिक राजनीतिक संकेत
पीएम मोदी और मनीष तिवारी की मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन इस घटना को लेकर न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही कांग्रेस की ओर से किसी नए राजनीतिक घटनाक्रम या बदलाव का संकेत दिया गया है। ऐसे में इस मुलाकात को लेकर सामने आ रही अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की मुलाकात ने मानसून सत्र से पहले राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। हालांकि, फिलहाल इसे एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई औपचारिक मुलाकात के रूप में ही देखा जा रहा है। भविष्य में यदि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तभी इसके व्यापक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो पाएंगे।
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