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फ्रांस में फिर साथ दिखेंगे PM मोदी-ट्रंप, डेढ़ साल बाद होगी दोनों नेताओं की खास मुलाकात

PM Modi Donald Trump Meet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के तहत फ्रांस पहुंच चुके हैं। इस दौरे में वह फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे। फ्रांस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ-साथ प्रधानमंत्री कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी प्रस्तावित बैठक भी खास चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसकी पुष्टि व्हाइट हाउस की ओर से की गई है।

वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में प्रौद्योगिकी, वैश्विक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। फ्रांस में आयोजित G-7 सम्मेलन के दौरान वह कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भी उनकी विस्तृत बातचीत होने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा की जाएगी।

16 महीने बाद होगी मोदी-ट्रंप मुलाकात

फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात की संभावना है। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात 25 फरवरी 2025 को हुई थी। करीब 16 महीने बाद दोनों नेता आमने-सामने होंगे। हाल ही में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को लगातार 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने पर शुभकामनाएं दी थीं, जिसके जवाब में पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका आभार व्यक्त किया था।

किन विषयों पर हो सकती है चर्चा?

प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियन में होने वाले G-7 सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान ट्रंप के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में फिलहाल अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, ऐसे में व्यापारिक संबंधों के अलावा रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के लिए वीजा व्यवस्था जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

मैक्रों के साथ रक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस

प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और व्यापक बनाने पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।

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