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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में खामियां, फिर भी PNC इंफ्राटेक को ₹3,500 करोड़ के नए ठेके

PNC Infratech NHAI: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में बार-बार सामने आई निर्माण गुणवत्ता की कमियों और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित करते हुए उसके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बावजूद, इसी कंपनी को उत्तर प्रदेश में करीब ₹3,483 करोड़ की दो नई हाईवे परियोजनाओं का ठेका दिए जाने से सवाल खड़े हो गए हैं।

₹3,483 करोड़ के दो HAM प्रोजेक्ट

कंपनी के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को NHAI के साथ दो हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) परियोजनाओं के लिए रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें NH-927 पर बाराबंकी से मुस्तफाबाद तक चार लेन हाईवे का ₹1,728 करोड़ का प्रोजेक्ट शामिल है, जिसे बाराबंकी मुस्तफाबाद हाईवे प्राइवेट लिमिटेड पूरा करेगी। वहीं मुस्तफाबाद से बिसवां तक चार लेन हाईवे का ₹1,755 करोड़ का प्रोजेक्ट मुस्तफाबाद बिसवां हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को मिला है। दोनों परियोजनाओं को 24 महीने में पूरा करना होगा और इनके संचालन की अवधि 15 वर्ष होगी।

CBI जांच में भी आया था नाम

PNC इंफ्राटेक का नाम 2024 में दर्ज CBI के एक कथित ₹10 लाख रिश्वत मामले में भी सामने आया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, हाईवे परियोजना से जुड़े कार्यों और मंजूरी के बदले NHAI के तत्कालीन जनरल मैनेजर-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक रिश्वत पहुंचाने का आरोप था। इस मामले में संबंधित अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था और PNC इंफ्राटेक से जुड़े चार अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम भी जांच में शामिल किए गए थे। कई स्थानों पर छापेमारी के बाद कंपनी ने जांच में सहयोग करने की बात कही थी।

एक्शन और नए ठेकों पर उठे सवाल

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लगातार मरम्मत और निर्माण संबंधी खामियों के बाद NHAI ने तकनीकी जांच शुरू की। सूत्रों के अनुसार, कंपनी को 'नॉन-परफॉर्मर' श्रेणी में रखते हुए नोटिस जारी करने, उसका पक्ष सुनने और ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है।

हालांकि, ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने से पहले कंपनी को नए प्रोजेक्ट दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि नए ठेके आवंटित करते समय कंपनी के पिछले प्रदर्शन, चल रही जांच और CBI के आरोपों को कितना महत्व दिया गया।

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