होम = Big News = Prayagraj: “ये चूड़ियां वही लाए थे, अब कैसे उतारूं…” पति को अंतिम विदाई देते समय पत्नी की चीख सुन नम हुईं आंखें

Prayagraj: “ये चूड़ियां वही लाए थे, अब कैसे उतारूं…” पति को अंतिम विदाई देते समय पत्नी की चीख सुन नम हुईं आंखें

Four Friends Dead: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में चार करीबी दोस्तों की एक साथ मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब केवल सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव तथा मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

पति की अंतिम विदाई पर टूट गई पत्नी

सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला जब एक मृतक की पत्नी अपने पति के पार्थिव शरीर के पास पहुंची। पति को अंतिम बार देखकर वह खुद को संभाल नहीं सकी। उसकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे और वह बार-बार यही कहती रही कि "ये चूड़ियां वही लाए थे, अब मैं इन्हें कैसे उतारूं?" मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार पत्नी अपने पति के शव से लिपटकर लगातार रोती रही। उसकी पीड़ा देखकर वहां मौजूद रिश्तेदारों, पड़ोसियों और अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

आखिरी बार मांग में भरवाया सिंदूर

हिंदू परंपराओं के अनुसार विवाहिता महिलाओं के लिए सिंदूर और चूड़ियां सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार से पहले पत्नी ने अपने पति के पार्थिव शरीर के सामने आखिरी बार अपनी मांग में सिंदूर भरवाने की इच्छा जताई। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। पति के निधन के साथ ही उसका सुहाग उजड़ गया, लेकिन अंतिम विदाई से पहले उसने अपने जीवनसाथी से जुड़ी आखिरी निशानी को सहेजने की कोशिश की।

चार दोस्तों की दोस्ती का दुखद अंत

स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक चारों युवक आपस में बेहद घनिष्ठ मित्र थे। वे अक्सर साथ रहते थे और एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा खड़े नजर आते थे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि इन चार दोस्तों की जिंदगी का सफर एक साथ खत्म हो जाएगा। हादसे के बाद चारों परिवारों में कोहराम मच गया। परिजन बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन सी घड़ी थी जिसने एक साथ चार घरों के चिराग बुझा दिए।

अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

चारों युवकों के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हर किसी के चेहरे पर दुख और आंखों में आंसू दिखाई दे रहे थे। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। लोगों ने नम आंखों से अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दी। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया है। कई परिवार अब भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनके अपने अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।

पूरे इलाके में शोक की लहर

चार दोस्तों की एक साथ मौत ने न केवल उनके परिवारों बल्कि पूरे प्रयागराज क्षेत्र को भावुक कर दिया है। हादसे के बाद से लोग लगातार पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कि काश यह हादसा टल जाता तो आज चार परिवारों की खुशियां यूं उजड़ती नहीं।

प्रयागराज का यह दर्दनाक हादसा चार परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म बन गया है। एक ओर चार दोस्तों की एक साथ मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया, वहीं पति को अंतिम विदाई देते समय पत्नी का विलाप हर किसी की आंखें नम कर गया। जीवन की अनिश्चितता को दर्शाने वाली यह घटना बताती है कि एक पल में सब कुछ बदल सकता है। अब परिवारों के पास अपने प्रियजनों की यादें ही बची हैं, जबकि पूरे इलाके में उनके असमय निधन का गहरा दुख और शोक का माहौल बना हुआ है।

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