Russian Oil Revenues: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भले ही भारत में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर लौटे हों, लेकिन मॉस्को पहुंचते ही उन्हें वैश्विक मोर्चे पर एक बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। दुनिया की प्रमुख लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएँ EU और G7 रूस के समुद्री तेल व्यापार को लगभग ठप करने की दिशा में सबसे कठोर कदम उठाने की तैयारी में हैं। यह वही व्यापार है जिससे रूस अपने बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा कमाता है।
क्या है नई रणनीति
Reuters की खास रिपोर्ट के मुताबिक, G7 और EU रूसी तेल ले जाने वाले जहाज़ों, बीमा और पंजीकरण सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसका मतलब रूस चाहे किसी भी देश को तेल भेजे, पश्चिमी टैंकर, बीमा और रजिस्ट्रेशन सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। हालाँकि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने तेल आयात पर रोक लगाई थी, लेकिन निर्यात को रोकने की बजाय ‘प्राइस कैप सिस्टम’ लागू किया गया था। इससे रूस कमाई तो कर रहा था, लेकिन सीमित। समय के साथ मॉस्को ने नियमों से बचने के लिए 1,423 जहाज़ों वाली विशाल ‘शैडो फ्लीट’ खड़ी कर ली।
क्यों बढ़ी पश्चिम की नाराज़गी?
रूस (Russian Oil Revenues) ने एशियाई बाजारों खासकर भारत और चीन को बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा। इनमें से लगभग 38% तेल आज भी यूरोपीय टैंकरों से जाता है, खासकर ग्रीस, माल्टा और साइप्रस के जहाज़ों से। यही पश्चिम के लिए ‘सबसे बड़ा loophole’ बन गया है।
अगर नया प्रतिबंध लागू हुआ तो-
रूस को पूरी तरह शैडो फ्लीट पर निर्भर होना पड़ेगा
पश्चिमी बीमा और जहाजरानी सेवाएँ खत्म होते ही उसका निर्यात घट सकता है
एशियाई बाज़ारों में तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है
युद्धकालीन राजस्व में सीधा झटका पड़ेगा
EU का 20वां प्रतिबंध पैकेज जल्द
EU सदस्य देश चाह रहे हैं कि यह प्रस्ताव उनके अगले प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा बने, जो 2026 की शुरुआत में लागू हो सकता है। अमेरिका और ब्रिटेन इसे आगे बढ़ाने के बड़े समर्थक हैं। अंतिम निर्णय नए अमेरिकी प्रशासन की रणनीति पर निर्भर करेगा। अगर समुद्री रूट पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होता है, तो रूस को अपनी पूरी तेल रणनीति बदलनी पड़ेगी। यह कदम उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था पर अब तक का सबसे कड़ा आघात साबित हो सकता है।
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