Iran student protests 2026: ईरान में हाल ही में हुए व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाए जाने के कुछ सप्ताह बाद देश के विश्वविद्यालयों में एक बार फिर विरोध की आवाजें गूंज उठीं। शनिवार को छात्रों ने मौजूदा धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और कैंपस के भीतर सभाएं कीं। रिपोर्टों के मुताबिक, ये प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए बड़े आंदोलन की अगली कड़ी हैं, जिसे सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई के जरिए नियंत्रित किया था।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय समेत राजधानी तेहरान के प्रमुख संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र जुटे दिखाई दिए। कुछ फुटेज में भीड़ को सरकार के खिलाफ नारे लगाते और नेतृत्व की आलोचना करते सुना गया। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, तेहरान के अलावा बेहेश्ती और अमीर कबीर विश्वविद्यालयों तथा पूर्वोत्तर के मशहद स्थित विश्वविद्यालय में भी विरोध प्रदर्शन हुए।
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प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़ी अर्धसैनिक इकाइयों को तैनात किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में झड़पों और कुछ लोगों के घायल होने की खबर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की आलोचना करते हुए नारे लगाए। वहीं, ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित पुत्र रेजा पहलवी का नाम भी नारों में लिया गया।
पश्चिमी शहर अब्दानन में भी एक शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इस क्षेत्र में कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।
ईरानी धार्मिक नेतृत्व का कहना है कि हालिया अशांति में 3,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, और उन्होंने हिंसा के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया। दूसरी ओर, अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) का दावा है कि मृतकों की संख्या 7,000 से अधिक हो सकती है, जिनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की थी।
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प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले सख्त रुख अपनाया था, हालांकि बाद में उनका ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित रहा। हाल के महीनों में ओमान की मध्यस्थता से बातचीत दोबारा शुरू हुई है, लेकिन वाशिंगटन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है। ईरान में जारी विरोध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने देश की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है, जहां छात्रों की आवाजें फिर से बदलाव की मांग कर रही हैं।
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