बांग्लादेश के बरिशाल में वरिष्ठ पत्रकार और समकाल के पूर्व ब्यूरो चीफ पुलक चटर्जी मृत पाए गए।
बांग्लादेश के बरिशाल में वरिष्ठ पत्रकार पुलक चटर्जी की मौत से पत्रकारिता जगत में शोक है। 57 वर्षीय चटर्जी का शव शुक्रवार शाम दैनिक ‘समकाल’ के बरिशाल ब्यूरो ऑफिस से बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक, उनका शव कार्यालय की दूसरी मंजिल पर फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से पांच हस्तलिखित नोट भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलक चटर्जी ‘समकाल’ के बरिशाल ब्यूरो चीफ रह चुके थे। वह बरिशाल प्रेस क्लब के पूर्व महासचिव भी थे।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, करीब तीन साल पहले उन्होंने समकाल में अपनी नौकरी गंवाई थी। इसके बाद से वह काम नहीं कर रहे थे। इससे पहले वह ‘जुगांतर’ अखबार से भी जुड़े रहे थे। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी हैं।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे समकाल के कार्यालय से संबंधित सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यालय का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खोलने के बाद पुलिस को पुलक चटर्जी का शव फंदे से लटका मिला। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने घटनास्थल से पांच नोट बरामद किए। ये नोट उनकी पत्नी और बेटी, छोटे भाई, बरिशाल प्रेस क्लब के एक पदाधिकारी, समकाल के एक सहयोगी और प्रशासन के नाम बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, नोटों की लिखावट को परिजनों और सहयोगियों ने पुलक की लिखावट बताया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बाद की पुलिस जानकारी के आधार पर शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई गई है। हालांकि, मौत की परिस्थितियों की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी।
‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों में पुलक ने लंबे समय से बीमारी और इलाज को लेकर परेशानी का जिक्र किया था। एक नोट में उन्होंने इलाज के लिए भारत के वेल्लोर जाने की बात भी लिखी थी।
उनकी पत्नी ने भी बताया कि नौकरी जाने के बाद वह निराश रहते थे। हालांकि, परिवार ने यह नहीं सोचा था कि वह इस तरह का कदम उठा सकते हैं।
पुलक चटर्जी की मौत के बाद बांग्लादेश की अवामी लीग ने मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने उनकी मौत की गहन जांच की मांग की है।
अवामी लीग ने दावा किया कि घटनास्थल की परिस्थितियां कई सवाल खड़े करती हैं। पार्टी ने अल्पसंख्यकों और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।
हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध पुलिस रिपोर्टों में फिलहाल हत्या की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की शुरुआती जांच आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है।
पुलक चटर्जी हिंदू समुदाय से थे और लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे। उनकी मौत के बाद बांग्लादेश में पत्रकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आगे बढ़ने के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
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