कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़े मानहानि केस में उन्हें राहत नहीं मिली। कोर्ट ने केस रद्द करने से इनकार कर दिया है।
यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है। राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने दलील दी थी कि उनके बयान में भाजपा का नाम नहीं लिया गया था।
राहुल गांधी ने क्या दलील दी?
राहुल गांधी के वकील सुदीप पासबोला ने कोर्ट में अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा कि कथित बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं था।
वकील के मुताबिक, बयान में किसी निश्चित या पहचान योग्य समूह को निशाना नहीं बनाया गया। ऐसे में शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि का केस चलाने का आधार नहीं है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने की। कोर्ट ने राहुल गांधी की दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है। इसलिए इसे एक पहचान योग्य संस्था माना जा सकता है।
इसके अलावा, कोर्ट ने टिप्पणी के प्रभाव को लेकर भी अहम बात कही। बयान का वास्तविक आशय क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों पर क्या असर पड़ा, यह ट्रायल में तय होगा।
‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़ा मामला
मानहानि का यह मामला राहुल गांधी की कथित ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़ा है। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से भाजपा और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज की गई।
महाराष्ट्र सरकार ने भी किया विरोध
राहुल गांधी की याचिका का महाराष्ट्र सरकार ने भी विरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट में अपनी दलील रखी गई।
महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल ने कहा कि मानहानि के अपराध से जुड़ी जरूरी कानूनी शर्तों को देखना होगा। साथ ही, यह भी तय करना होगा कि टिप्पणी किसी निश्चित और पहचान योग्य समूह से संबंधित थी या नहीं।
अब ट्रायल में तय होगा मामला
फिलहाल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि केस को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इसलिए राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।
वहीं, बयान का वास्तविक मतलब क्या था और उससे भाजपा के सदस्यों पर क्या असर पड़ा, इसका फैसला ट्रायल में होगा।

