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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में 10 दिनों में 9 मौतें

Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में सामने आए मामलों ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) में पिछले छह दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत हुई, जबकि बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में चार दिनों के भीतर एक नाबालिग समेत 4 महिलाओं की जान चली गई।

भीलवाड़ा में सभी की हुई थी सिजेरियन डिलीवरी

भीलवाड़ा में मृत पांचों महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल ICU में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतकों में 11 जुलाई को संगीता जीनगर, 5 जुलाई को शिमला गुर्जर, 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे और 9 जुलाई को दिव्या शामिल हैं। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। मार्च से अब तक यहां प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा 9 पहुंच गया है, जिनमें 5 मौतें जुलाई के पहले 11 दिनों में हुईं।

30-40 सिजेरियन, लेकिन सिर्फ 8 सर्जिकल सेट

अस्पताल में रोजाना 30-40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि नियमित और आपातकालीन उपयोग के लिए केवल 8 सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं। एक सेट को दोबारा उपयोग से पहले करीब तीन घंटे तक स्टरलाइज करना पड़ता है, जिससे संक्रमण की आशंका जताई जा रही है।

अस्पताल ने संक्रमण से किया इनकार

ऑपरेशन थिएटर की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सवाल उठे, लेकिन अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने कहा कि मौतें संक्रमण नहीं बल्कि मेडिकल कॉम्प्लिकेशन के कारण हुईं। संबंधित ऑपरेशन थिएटर को तीन दिन से बंद कर स्टरलाइजेशन और फ्यूमिगेशन किया जा रहा है। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने भी कहा कि शुरुआती जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

बांसवाड़ा में भी चार मौतें, जांच के आदेश

बांसवाड़ा में 7 से 10 जुलाई के बीच एक नाबालिग समेत चार प्रसूताओं की मौत हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक की हालत गंभीर थी, दो महिलाओं की मौत गंभीर एनीमिया और एक की ऑपरेशन के दौरान उच्च रक्तचाप से हुई। इनमें दो की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जयपुर से डॉ. पवन और डॉ. अभिनव की दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम जांच के लिए भेजी है। संयुक्त शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि हर मामले की अलग-अलग जांच होगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मई में कोटा और जून में बीकानेर में भी प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आने के बाद अब इन घटनाओं ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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