Haryana-Bihar Rajya Sabha Election:
Haryana-Bihar Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। कई राज्यों में जहां उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है, वहीं बिहार और हरियाणा में अतिरिक्त उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है। इन दोनों राज्यों में अब राजनीतिक समीकरणों और विधायकों के समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। संख्या बल के आधार पर चार उम्मीदवारों की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। इस सीट के लिए राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार एडी सिंह आमने-सामने हैं। इस मुकाबले ने सियासी रणनीति और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। विधानसभा में दलों की ताकत को देखते हुए राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। इनके अलावा जदयू से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा के राज्य महासचिव शिवेश कुमार ने भी अपना पर्चा भरा है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इन चारों नेताओं की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में मुकाबले का केंद्र सिर्फ पांचवीं सीट बन गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि विधानसभा में पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल है। हालांकि दूसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और उद्योगपति सतीश नांदल के बीच टक्कर देखने को मिलेगी। हरियाणा की राजनीति में पहले भी कई बार ऐसे मुकाबलों में उद्योगपतियों की जीत का इतिहास रहा है, जिससे इस चुनाव को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवारों के बीच सहमति बनने के कारण कई नेताओं का राज्यसभा में निर्विरोध पहुंचना तय माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और भाजपा नेता विनोद तावड़े समेत महायुति के छह उम्मीदवार बिना मुकाबले उच्च सदन में पहुंच सकते हैं। इसके अलावा भाजपा ने रामराव वाडकुटे और माया इवानते को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पार्टी प्रवक्ता ज्योति वाघमारे को मैदान में उतारा है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने भी नामांकन दाखिल किया है, जिनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस बार राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जो देश के दस राज्यों से संबंधित हैं। इनमें
• हिमाचल प्रदेश से 1 सीट
• छत्तीसगढ़, तेलंगाना और हरियाणा से 2-2 सीट
• ओडिशा से 4 सीट
• बिहार और पश्चिम बंगाल से 5-5 सीट
• तमिलनाडु से 6 सीट
• महाराष्ट्र से सबसे अधिक 7 सीटें शामिल हैं।
ज्यादातर राज्यों में उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना के बावजूद बिहार और हरियाणा के मुकाबले ने चुनावी रोमांच बढ़ा दिया है। इन राज्यों में अंतिम परिणाम विधायकों के समर्थन और राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने तक सियासी हलचल जारी रहने की संभावना है।
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