होम = Breaking = भारत-पाक रिश्तों पर राम माधव: ‘Pak के बदले बिना नहीं होगी बातचीत’, ट्रैक-2 वार्ता की खबरों को बताया अफवाह

भारत-पाक रिश्तों पर राम माधव: ‘Pak के बदले बिना नहीं होगी बातचीत’, ट्रैक-2 वार्ता की खबरों को बताया अफवाह

Ram Madhav India Pakistan Relations: भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने वरिष्ठ पत्रकार वसिंद्र मिश्रा के साथ बातचीत में भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने सभी पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध चाहता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की औपचारिक या अनौपचारिक (ट्रैक-2) वार्ता का कोई प्रयास नहीं चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोलंबो में आयोजित दक्षिण एशियाई सम्मेलन को लेकर ट्रैक-2 संवाद की जो खबरें सामने आईं, वे पूरी तरह अफवाह थीं और इस समय ऐसा कोई प्रयास करने के लिए माहौल भी अनुकूल नहीं है।

कोलंबो सम्मेलन पर क्या कहा?

राम माधव ने बताया कि यह दक्षिण एशियाई सम्मेलन पिछले लगभग 20 वर्षों से नियमित रूप से आयोजित होता है, जिसमें दक्षिण एशिया के आठ देशों के साथ चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के प्रतिनिधि, राजनयिक तथा विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा होती है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों वाले सत्र में भारतीय पक्ष ने साफ कहा कि भारत के पास पाकिस्तान से वार्ता की न तो कोई इच्छा है और न ही कोई जल्दबाजी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में आतंकवाद पर भी चर्चा हुई और भारतीय प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर हमेशा की तरह सख्त रुख रखा।

'ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद का जवाब था'

राम माधव ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों का कड़ा जवाब देना था। उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में भी पाकिस्तान समर्थित घुसपैठ की कोशिशें जारी रहीं। भारतीय सुरक्षा बलों ने कई आतंकियों को मार गिराया और कई को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आतंकियों से मिली जानकारी भी यही बताती है कि पाकिस्तान की मानसिकता और आतंकवाद को लेकर उसका रवैया बिल्कुल नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि देश में भी इस बात पर व्यापक सहमति है कि वर्तमान समय में पाकिस्तान से बातचीत का कोई औचित्य या विशेष उपयोगिता नहीं है।

'जिम्मेदारी पूरी तरह पाकिस्तान की'

राम माधव ने कहा कि भारत-पाक संबंधों में सुधार की पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है। उन्होंने कहा कि भारत के पास न बातचीत की इच्छा है और न ही किसी प्रकार की जल्दबाजी। उन्होंने याद दिलाया कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद यूपीए सरकार ने पाकिस्तान से वार्ता बंद कर दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सद्भावना दिखाते हुए अफगानिस्तान से लौटते समय लाहौर जाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की, लेकिन उसके बाद उरी, बालाकोट, पहलगाम जैसे घटनाक्रम सामने आए।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा के बाद हुए कारगिल युद्ध का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हर बार सद्भावना दिखाई, लेकिन बदले में आतंकवाद मिला। उनके अनुसार आज भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है, इसलिए उसे किसी भी तरह की जल्दबाजी दिखाने की आवश्यकता नहीं है। जब तक पाकिस्तान अपने आतंकवादी ढांचे पर निर्णायक कार्रवाई कर अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक बातचीत का कोई सवाल नहीं उठता

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