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राम मंदिर चढ़ावा केस: सभी 8 आरोपी गिरफ्तार, ₹80 लाख बरामद

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने सभी को सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, सात आरोपियों के पास से 79,85,893 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। अब पुलिस आगे की पूछताछ और अन्य बरामदगी के लिए आरोपियों की रिमांड मांगेगी।

7 आरोपियों से बरामद हुई नकदी

यह मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की सिफारिशों के बाद दर्ज हुई। इसे राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी पहली बड़ी आपराधिक जांच माना जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल हैं। पुलिस उनके मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन और नकदी के आवागमन में कथित भूमिका की जांच कर रही है।

अन्य आरोपियों में अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सुभाष श्रीवास्तव बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और चढ़ावे की गिनती की निगरानी की जिम्मेदारी संभालते थे।

कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में

अयोध्या के अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने बताया कि सभी आरोपियों को विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि सात आरोपियों से कुल 79,85,893 रुपये नकद बरामद हुए हैं, जबकि सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी नहीं मिली।

जांच के दूसरे चरण में पुलिस

जांच अब दूसरे चरण में पहुंच गई है। पुलिस सभी आरोपियों की कस्टडी रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है ताकि चढ़ावे की कथित हेराफेरी, पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी (मनी ट्रेल), दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की जा सके। साथ ही अन्य नकदी, कीमती सामान और मामले से जुड़े सबूत भी बरामद किए जा सकें।

SIT की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई थी FIR

तीन सदस्यीय SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपते हुए चढ़ावे के प्रबंधन में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलने के आधार पर आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद गुरुवार को एफआईआर दर्ज की गई।

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) भी लगाई गई है।

कैसे शुरू हुई जांच?

पूर्व समाजवादी पार्टी मंत्री तेज नारायण पांडेय द्वारा अनियमितताओं के आरोप लगाए जाने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल थे। टीम ने 15 से 20 जून के बीच अयोध्या में प्रारंभिक जांच की।

जांच के दौरान दान पात्रों, नकदी की गिनती, सुरक्षित भंडारण, लेखा-प्रक्रिया, एक्सेस कंट्रोल और सीसीटीवी निगरानी सहित पूरे चढ़ावा प्रबंधन तंत्र की समीक्षा की गई। प्रारंभिक जांच में नकदी और कीमती चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के संकेत मिले।

अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बरामदगी या गिरफ्तारियां हो सकती हैं। उनका मानना है कि आरोपियों से कस्टोडियल पूछताछ कथित साजिश की पूरी परतें खोलने में अहम साबित होगी।

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