Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में नया मोड़ सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर गबन किए गए 58 लाख रुपये उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की जांच शुरू होने और मामला सार्वजनिक होने से पहले ही बरामद कर लिए गए थे। इससे मंदिर ट्रस्ट की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
ट्रस्ट ने पहले की थी आंतरिक जांच
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय के निर्देश पर आरोपी अविनाश शुक्ला के घर 5 जून को पुलिस के साथ पहुंचकर करीब 58 लाख रुपये बरामद किए। यह कार्रवाई आरोप सार्वजनिक होने और एसआईटी गठित होने से नौ दिन पहले हुई थी। इसके बाद 5 से 8 जून के बीच आरोपियों ने शेष राशि बैंक ट्रांसफर के जरिए लौटाई। बाद में चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद छोड़ दिए।
घटनाक्रम और जांच
सूत्रों के अनुसार, 4 जून को ट्रस्ट को कथित गबन की जानकारी मिली। 5 जून को बरामदगी हुई, 7 जून को मामला सार्वजनिक हुआ और 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर कथित गबन से जुड़ी रकम भी बरामद की। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
एसआईटी ने नकदी प्रबंधन, कर्मचारियों के सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में कई कथित खामियां भी चिन्हित की हैं। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है।
CCTV और राजनीतिक प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, एक सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला पुलिसकर्मियों के साथ काले बैग में कथित बरामद नकदी ले जाते दिखाई देते हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि सरकार की कड़ी निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी अनियमितता कैसे हुई। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पारदर्शी जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। अब जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि एफआईआर से पहले धन की बरामदगी में कहीं प्रक्रिया संबंधी चूक तो नहीं हुई।
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