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ऋषिकेश के वो मंदिर जहां राम ने की पूजा, लक्ष्मण ने की तपस्या और शत्रुघ्न ने साधा मौन

by | Jul 23, 2026 | ट्रैवल

Rishikesh Ancient Temples: उत्तराखंड का ऋषिकेश सिर्फ योग और अध्यात्म की नगरी के रूप में ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इसका संबंध भारतीय पौराणिक कथाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। गंगा किनारे बसे इस पवित्र शहर के कई मंदिरों के पीछे रामायण काल से जुड़ी मान्यताएं और कथाएं सुनने को मिलती हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम और उनके तीनों भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का ऋषिकेश से खास संबंध रहा है। यहां मौजूद प्राचीन मंदिर उनकी तपस्या, पूजा और साधना की कहानियां बताते हैं।

रघुनाथ मंदिर: जहां भगवान राम ने की थी विष्णु पूजा

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट के पास मायाकुंड के सामने स्थित रघुनाथ मंदिर को भगवान राम से जुड़ा पवित्र स्थान माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, राजा दशरथ के निधन के बाद भगवान राम अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए यहां आए थे। इसके बाद उन्होंने आत्मशुद्धि के लिए भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की थी। इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी वास्तुकला और प्राकृतिक दृश्य है। कहा जाता है कि मंदिर की परछाई सामने स्थित मायाकुंड के जल में साफ दिखाई देती है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक दूर-दूर से पहुंचते हैं।

भरत मंदिर: ऋषिकेश का सबसे प्राचीन मंदिर

त्रिवेणी घाट के पास स्थित भरत मंदिर को ऋषिकेश के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं बेहद प्राचीन हैं। कहा जाता है कि प्राचीन समय में रैभ्य मुनि ने इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया कि यह स्थान आगे चलकर ऋषिकेश के नाम से प्रसिद्ध होगा। मान्यता है कि बाद में भगवान भरत ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया, जिसके कारण इसका नाम भरत मंदिर पड़ा। आज भी यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

लक्ष्मण मंदिर: जहां लक्ष्मण ने की थी तपस्या

ऋषिकेश के प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला क्षेत्र के पास स्थित लक्ष्मण मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान लक्ष्मण ने गंगा किनारे इसी शांत स्थान पर लंबे समय तक तपस्या की थी। उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए थे। यही वजह है कि इस स्थान को बेहद पवित्र माना जाता है। लक्ष्मण झूला घूमने आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते हैं।

शत्रुघ्न मंदिर: मौन साधना से जुड़ी कहानी

ऋषिकेश के मुनि की रेती क्षेत्र में स्थित शत्रुघ्न मंदिर भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान शत्रुघ्न ने इस स्थान पर मौन रहकर कठिन तपस्या की थी। उनके इसी मौन साधना से जुड़ी मान्यता के कारण इस क्षेत्र को पहले "मौन" कहा जाने लगा था, जो समय के साथ बदलकर "मुनि की रेती" के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर के पास स्थित शत्रुघ्न घाट आज भी शांति और ध्यान के लिए प्रसिद्ध है। यहां आने वाले लोग कुछ समय ध्यान और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

ऋषिकेश की धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं ये मंदिर

ऋषिकेश के ये मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रतीक भी हैं। इनसे जुड़ी कथाएं लोगों को अध्यात्म, आस्था और इतिहास से जोड़ती हैं। गंगा किनारे बसे इन मंदिरों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को यहां धार्मिक शांति के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी अनुभव मिलता है।

ऋषिकेश की पहचान सिर्फ गंगा, योग और ध्यान तक सीमित नहीं है। यहां मौजूद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से जुड़े मंदिर इस नगरी के पौराणिक महत्व को और बढ़ाते हैं। इन मंदिरों से जुड़ी कथाएं आज भी लोगों को आस्था और आध्यात्मिकता से जोड़ती हैं।

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