RSS Chief Bhagwat Speech: 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को सिर्फ शरणार्थी कहना सही नहीं होगा, बल्कि वे “संघर्ष के योद्धा” थे जिन्होंने अपनी जमीन, कारोबार और पीढ़ियों की संपत्ति छोड़कर भारत को इसलिए चुना ताकि वे बिना डर अपने धर्म का पालन कर सकें।
मोहन भागवत ने यह बयान बुधवार को नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान दिया। उन्होंने 1947 के विभाजन के बाद भारत आए लोगों की भूमिका और उनके निर्णय पर अपनी बात रखी।
RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के तहत मोहन भागवत शुक्रवार को प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो जारी करेंगे। इसी दिन ‘डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालिवाहन’ शीर्षक यूट्यूब वीडियो का सार्वजनिक प्रसारण भी किया जाएगा। इसके बाद 5 जुलाई को वे नागपुर में ‘सनमार्ग माइंड वेलनेस सेंटर’ का उद्घाटन करेंगे, जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल होंगे।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने के लिए कहेगा, तो वे तुरंत इसका पालन करेंगे। उन्होंने 75 वर्ष की उम्र के बाद पद छोड़ने की परंपरा का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए किसी विशेष जाति की योग्यता नहीं होती, बल्कि जो भी हिंदू संगठन के लिए समर्पित होकर काम करता है, वही इस पद के लिए उपयुक्त माना जाता है।
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