Breaking

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- दुनिया सीखना चाहती है संघ की कार्यशैली, युवाओं के प्रशिक्षण पर दिया जोर

Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ की कार्यशैली और व्यक्तित्व निर्माण की पद्धति को लेकर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों से लोग आरएसएस के कार्यों को समझने आ रहे हैं और युवाओं के प्रशिक्षण की इसकी पद्धति के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

विदेशों में बढ़ रही आरएसएस की कार्यशैली में दिलचस्पी

शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों से लोग आरएसएस के कामकाज का अध्ययन करने आते हैं। उन्होंने बताया कि कई प्रतिनिधि यह जानना चाहते हैं कि संघ जिस तरीके से युवाओं का व्यक्तित्व निर्माण करता है, क्या उस मॉडल को उनके देशों में भी अपनाया जा सकता है।

यह कार्यक्रम 'डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालिवाहन' शीर्षक यूट्यूब वीडियो के सार्वजनिक प्रसारण के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो भी जारी किए गए। प्रचारक आरएसएस के पूर्णकालिक स्वयंसेवक होते हैं, जो संगठन के विस्तार और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

व्यक्तित्व निर्माण को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

भागवत ने कहा कि आरएसएस का मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्व तैयार करना है, जो समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक योगदान दे सकें। उनके अनुसार संघ केवल कार्यक्रमों या गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वयंसेवकों के जीवन में संस्कार, अनुशासन और सेवा भाव विकसित करना उसकी पहली प्राथमिकता है।

आरएसएस सभी संगठनों को नियंत्रित नहीं करता

अपने संबोधन में भागवत ने उस धारणा को भी खारिज किया कि संघ विभिन्न संगठनों को पर्दे के पीछे से संचालित करता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत स्वयंसेवक अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। केवल स्वयंसेवकों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि सभी संस्थाओं का संचालन आरएसएस करता है।

राष्ट्र निर्माण और धर्म की रक्षा पर दिया जोर

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संगठन का लक्ष्य केवल व्यक्तित्व विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र को मजबूत और सक्षम बनाना भी है। उन्होंने कहा कि समाज को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए, ताकि देश और अधिक सशक्त बन सके।

दुनिया भारत से कर रही सही मार्गदर्शन की अपेक्षा

मोहन भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व भारत से सकारात्मक नेतृत्व और मार्गदर्शन की उम्मीद कर रहा है। उनका कहना था कि भारत तभी यह भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकेगा, जब वह सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और गौरवशाली बने।

उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ समाज में आरएसएस के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता बढ़ी है। शुरुआती दौर में संगठन को जिस उपेक्षा का सामना करना पड़ा था, अब वह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है और अधिक लोग संघ के कार्यों को समझने लगे हैं।

ये भी पढ़ें: Aaj Ka Rashifal: किस राशि को मिलेगा धन लाभ, किसे रहना होगा सतर्क? पढ़ें अपना भविष्यफल


Deepika Gupta

Recent Posts

IIT बॉम्बे छात्र की मौत के बाद माता-पिता का अनशन, ‘प्रताड़ित करने वालों’ पर कार्रवाई की मांग

IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…

6 hours ago

‘वोट चोरी’ से होती है ‘कानून चोरी’: राहुल गांधी बोले- सांसदों के बनाए कानून भी अवैध

Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…

6 hours ago

AI की रफ्तार बढ़ी तो बढ़ेगा ई-कचरा, 2050 तक हर साल 6.1 करोड़ टन तक निकल सकता है वेस्ट

AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…

8 hours ago

मेरठ सेंट्रल मार्केट के 650 व्यापारियों को राहत, सरकार लाएगी विशेष पुनर्वास नीति

Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…

8 hours ago

गोवा में वोटर डिलीट करने के बाद नाम नहीं हो सका बहाल; EC ने Form 7 का दिया हवाला

ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…

8 hours ago

‘देशभर में होगा प्रदर्शन’: CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में की इस्तीफे की मांग

CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…

9 hours ago