Sanjay Dutt Marathi Comment Controversy: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही सियासत के बीच अभिनेता संजय दत्त की एक टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रविवार को एक दही-हांडी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने को कहा। इसके जवाब में संजय दत्त ने कहा, "मैं छह साल येरवडा जेल में रहा, फिर भी मराठी नहीं सीख पाया।" उनकी इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंस पड़े। हालांकि, इसके बाद बीजेपी और शिवसेना के बीच बयानबाजी तेज हो गई।
कार्यक्रम में संजय दत्त की टिप्पणी के बाद वहां मौजूद लोगों ने हंसी-मजाक किया, लेकिन मराठी भाषा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाले नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई। खास तौर पर मंत्री प्रताप सरनाईक के हंसने को लेकर सवाल उठाए गए। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने सरनाईक पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई अभिनेता मराठी नहीं जानने की बात पर हंसता है तो मंत्री भी हंसते हैं, लेकिन आम लोगों को मराठी न आने पर धमकी और मारपीट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि यह कैसा न्याय है।
नरेंद्र मेहता ने शिवसेना के रवैये पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरनाईक के शब्द और उनके काम अलग-अलग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया और वह इसलिए मंत्री हैं, क्योंकि एक 'डमी मंत्री' की जरूरत है। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रताप सरनाईक ने ठाणे के मीरा-भायंदर में एक कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र मेहता पर बिना नाम लिए निशाना साधा था। अब संजय दत्त की टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के बीच पुरानी तनातनी भी चर्चा में आ गई है।
विवाद में कांग्रेस भी शामिल हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने आरोप लगाया कि शिवसेना मराठी भाषा के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि भाषा के विकास के नाम पर शिवसेना ने कोई ठोस काम नहीं किया। लोंढे ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कार्यकाल में की गई तैयारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मुंबई आते हैं, लेकिन बीजेपी और शिवसेना भाषा के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही हैं।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है। स्थानीय भाषा को लेकर राज्य के बाहर से आने वाले लोगों के साथ विवाद और टकराव के मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का फैसला लिया था। हालांकि, भारी विरोध के बाद इसे एक साल के लिए टाल दिया गया। ऐसे में संजय दत्त की टिप्पणी ने एक बार फिर भाषा के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
संजय दत्त की टिप्पणी भले ही एक कार्यक्रम में मजाक के तौर पर कही गई हो, लेकिन इसके बाद बीजेपी और शिवसेना के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मराठी भाषा के मुद्दे पर महायुति गठबंधन में पहले से मौजूद मतभेद अब खुलकर सामने आते दिख रहे हैं।
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