क्राइम

30 बच्चियों को शिकार बना चुका सीरियल किलर.. अदालत ने दी उम्रकैद की सजा

Serial Killer Ravinder Kumar : दिल्ली की अदालत ने शनिवार को एक हैवान दरिंदे को एक बार फिर गुनहगार करार दिया। 35 साल के रविंद्र कुमार के जुर्म की दास्तान इतनी खौफनाक है कि सुनकर किसी का भी रूह कांप जाए। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए हैं और आरोपी की सफाई में कोई दम नहीं है। अब उसे 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।

यह मामला 2014 का है। ढाई साल की मासूम अचानक घर से गायब हो गई थी। कुछ घंटों बाद उसकी लाश मिली। पुलिस की तफ्तीश ने रविंद्र कुमार तक पहुंचा। उसकी गिरफ्तारी किया। पूछताछ के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। रविंद्र ने खुद कुबूल किया कि वो अब तक 30 बच्चियों को शिकार बना चुका है।

2015 केस में उम्रकैद की सजा

2015 में छह साल की बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के लिए उसे उम्रकैद की सजा मिली थी। मजबूत चार्जशीट के बाद मई 2023 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और कहा कि इसमें कोई दया की जगह नहीं है। तबसे वो सलाखों के पीछे हैं।

नशे और पोर्न फिल्मों की लत ने रविंद्र को हैवान बना दिया

उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला रविंद्र कुमार मजदूर परिवार से ताल्लुक रखता है। पिता प्लंबर और मां घरेलू काम करती थीं। 2008 में काम की तलाश में दिल्ली आया, लेकिन यहां नशे और पोर्न फिल्मों की लत ने उसे हैवान बना दिया। उसी साल उसने पहली बच्ची का रेप और हत्या की थी। पकड़ा नहीं गया और उसका बढ़ता चला गया।

रविंदर ने कब से कितनी वारदातों को कबूला?

पुलिस जांच में सामने आया कि  2008 से 2015 के बीच Serial Killer Ravinder Kumar ने 15 से 30 मासूमों के अपहरण, बलात्कार और हत्या की वारदातों को कबूला है। उसने इन वारदातों का विस्तृत वर्णन किया, जिससे कई संदिग्धों की क्लीन चिट भी संभव हुई।

वह रोजाना लगभग 40 किलोमीटर तक पैदल घुमता और कामधंधों या झुग्गियों में बच्चों को लुभा कर अपने साथ ले जाता था, फिर सुनसान जगहों पर उनकी हत्या करता और शवों के साथ भी दुर्व्यवहार करता था।

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क्या कहा अदालत ने

अदालत ने रविंद्र कुमार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 (हत्या) और 363 (अपहरण) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने साफ कहा, “उसका अपराध अमानवीय और निर्मम है। न समाज को, न अदालत को और न ही कानून को उसके लिए किसी नरमी की गुंजाइश है।” यह सिर्फ एक कातिल की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।

Shweta Gupta

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