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पहले छात्रों से मुलाकात, फिर पीएम मोदी से बैठक; शरद पवार के कदम पर उठे सवाल

by | Jul 22, 2026 | Cover Story Top

Sharad Pawar PM Modi Meeting: संसद के मॉनसून सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस बैठक के बाद विपक्षी दलों के बीच संभावित रणनीति और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

पहले छात्रों से मिले शरद पवार

इस घटनाक्रम से पहले शरद पवार ने छात्रों से मुलाकात की थी। छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के बाद उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बैठक को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। विपक्षी दलों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि पवार का यह कदम किस दिशा की ओर इशारा कर रहा है।

पीएम मोदी से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार की बैठक को लेकर अभी तक दोनों पक्षों की ओर से कोई विस्तृत राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, इस मुलाकात ने विपक्षी खेमे में संभावित मतभेदों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे विपक्षी दल कई मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में पवार की प्रधानमंत्री से मुलाकात को विपक्ष की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डिलिमिटेशन बिल को लेकर चर्चा तेज

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संसद के आगामी सत्र में प्रस्तावित डिलिमिटेशन बिल को लेकर एनसीपी (शरद पवार) गुट के रुख पर भी नजर बनी हुई है। ऐसी चर्चाएं हैं कि पार्टी कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार के प्रस्तावों का समर्थन कर सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

विपक्षी एकता पर उठे सवाल

शरद पवार भारतीय राजनीति के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं और उनके फैसलों को अक्सर बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जाता है। उनकी प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर भी इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि आने वाले दिनों में रणनीति कैसी होगी।

शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने दिल्ली की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक राजनीतिक संकेत सामने नहीं आया है, लेकिन इस बैठक को लेकर विपक्षी खेमे में सतर्कता जरूर बढ़ गई है। आने वाला संसद सत्र राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

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