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जानिए कौन है कश्मीर ऑपरेशन के लिए ‘शौर्य चक्र’ पाने वाले नौसेना अधिकारी मरीन कमांडो सूरज प्रशार?

New Delhi: राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने सोमवार को भारतीय सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों के जवानों के असाधारण साहस और वीरता को सम्मानित करते हुए प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार प्रदान किए। शौर्य चक्र पाने वालों में लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार भी शामिल रहे, जिन्हें जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में चलाए गए ऑपरेशन चुंटावाड़ी के दौरान दिखाए गए साहस के लिए सम्मानित किया गया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में सुरक्षा बलों ने समन्वित कार्रवाई करते हुए भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों का सफाया किया। लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार और उनके साथियों की बहादुरी और सूझबूझ के कारण यह अभियान सफल रहा।

रक्षा अलंकरण समारोह 2026 में मिला सम्मान

राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (प्रथम चरण) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीरता पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार के अलावा असिस्टेंट कमांडेंट मोहम्मद शफीक, लेफ्टिनेंट कमांडर राम गोयल और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को भी ऑपरेशन चुंटावाड़ी के दौरान दिखाई गई बहादुरी और अभियान को सफल बनाने में योगदान के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

कौन हैं लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार?

लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार ने 5 और 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर के चुंटावाड़ी गांव में संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने असाधारण साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया, जिसके परिणामस्वरूप एक ए++ श्रेणी के विदेशी आतंकवादी को मार गिराया गया और युद्ध जैसे उपकरण एवं सामग्री बरामद की गई।

आतंकियों की गोलीबारी के बीच संभाला मोर्चा

अभियान के दौरान जब आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू की, तब सूरज प्रशार ने स्थिति का आकलन करते हुए लक्ष्य क्षेत्र के बेहद करीब एक रणनीतिक स्थान पर कब्जा किया। आतंकियों ने चुंटावाड़ी गांव के एक मकान में शरण ले रखी थी।

मुठभेड़ के दौरान घिरे हुए आतंकवादियों में से एक ने घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षा बलों के जवानों को गैर-घातक गोली लगने से घायल कर दिया। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार ने तुरंत छिपे हुए दूसरे आतंकवादी पर सटीक और नियंत्रित फायरिंग की। साथ ही उन्होंने वास्तविक समय में अपने साथियों को स्थिति की जानकारी भी देते रहे।

उनकी तत्परता और नेतृत्व के कारण रात करीब 8:25 बजे सुरक्षा बलों ने आतंकवादी को सफलतापूर्वक मार गिराया।

सूर्योदय तक बनाए रखी निगरानी

आतंकवादी के मारे जाने के बाद भी लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार ने सूर्योदय तक पूरे लक्ष्य क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी। इसके बाद उन्होंने संयुक्त टीम का नेतृत्व करते हुए अभियान क्षेत्र से युद्ध जैसी सामग्री और हथियारों की बरामदगी सुनिश्चित की।

उनका यह आचरण सामान्य कर्तव्य से कहीं बढ़कर था। उन्होंने अद्वितीय वीरता, नेतृत्व और समर्पण का परिचय दिया, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप माना गया।

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Tanisha Verma

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