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24 की उम्र में फैटी लिवर के बाद शराब छोड़ी, 6 महीने में बदली सेहत और सोच

Sober Journey: अगर कोई एक साल पहले इस युवती से मिलता, तो शायद ही सोच पाता कि वह अपनी मर्जी से शराब छोड़ देगी। कॉस्मोपॉलिटन, मार्टिनी, वाइन, बीयर और छुट्टियों या पार्टियों में ड्रिंक्स उसकी जिंदगी का हिस्सा थे। वह शराब की लत से परेशान नहीं थी, बल्कि यह जानना चाहती थी कि बिना शराब के जीवन कैसा होगा।

1 जनवरी को उसने एक दोस्त के साथ पूरे साल शराब न पीने का संकल्प लिया। शुरुआत में इसे एक सामान्य न्यू ईयर रिजॉल्यूशन माना गया, लेकिन छह महीने बाद भी दोनों अपने फैसले पर कायम हैं। इस दौरान ऑफिस पार्टियां, शादियां, यात्राएं, डिनर और दोस्तों के लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। सबसे कठिन काम शराब छोड़ना नहीं, बल्कि लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि वह सचमुच ऐसा कर रही है।

‘सिर्फ एक ड्रिंक’ का दबाव

इन छह महीनों में उसने बार-बार सुना — “कुछ नहीं होगा”, “बस एक ड्रिंक”, “तुम छुट्टी पर हो”, “छह महीने तो हो गए”, “आज तुम्हारा जन्मदिन है।” एक हाउस पार्टी में दोस्त और उसकी मां दोनों ने कहा, “रिजॉल्यूशन टूटने के लिए ही होते हैं।” उसे हैरानी हुई कि उसका शराब न पीना दूसरों को इतना असहज क्यों कर रहा था।

फैटी लिवर ने बदली सोच

पिछले साल 24 वर्ष की उम्र में उसे ग्रेड-2 फैटी लिवर का पता चला। यह उसके लिए बड़ा झटका था। शराब अकेली वजह नहीं थी, लेकिन इसने उसे अपनी जीवनशैली पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। छह महीने तक शराब से दूरी और अन्य स्वस्थ आदतों के बाद उसकी लिवर रिपोर्ट सामान्य हो गई।

त्वचा, नींद और ऊर्जा में सुधार

दो-तीन महीनों बाद त्वचा अधिक चमकदार दिखने लगी। चेहरा कम थका हुआ लगता था और डिहाइड्रेशन की समस्या घट गई। नींद बेहतर हुई, सुबह उठना आसान हो गया, वर्कआउट और रिकवरी में सुधार आया तथा ऊर्जा का स्तर अधिक स्थिर हो गया।

मानसिक बदलाव सबसे बड़ा

शराब न पीने से मानसिक स्पष्टता बढ़ी। अब न ड्रिंक की योजना बनानी पड़ती है, न अगले दिन पछताना पड़ता है। वह खुद को अधिक केंद्रित, कम चिंतित और सामाजिक परिस्थितियों में अधिक सहज महसूस करती है। उसे एहसास हुआ कि मजा दोस्तों और अनुभवों से आता है, शराब सिर्फ साथ मौजूद रहती है।

Gen Z क्यों कम पी रही है?

वह मानती है कि अब युवाओं में “सॉबर-क्यूरियस” यानी बिना शराब के जीवन को आजमाने का चलन बढ़ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस, बेहतर नींद और आत्मनियंत्रण को प्राथमिकता देने वाली पीढ़ी शराब को अनिवार्य सामाजिक साधन नहीं मानती।

डॉक्टरों की राय

हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. कविता शर्मा के अनुसार शराब छोड़ने के कुछ ही हफ्तों में लिवर में सुधार शुरू हो सकता है। प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन मेहता कहते हैं कि लोगों को मूड, एकाग्रता और उत्पादकता में सुधार सबसे अधिक चौंकाता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रिया कपूर इसे युवाओं में बढ़ती जागरूकता का संकेत मानती हैं।

छह महीने बाद

अब वह पार्टियों में कॉस्मोपॉलिटन की जगह मॉकटेल या स्पार्कलिंग वॉटर चुनती है। बेहतर स्वास्थ्य, साफ त्वचा, मजबूत अनुशासन और खुद से किया वादा निभाने का आत्मविश्वास उसे मिला है। क्या वह फिर कभी शराब पिएगी? इसका जवाब उसे नहीं पता। लेकिन इतना तय है कि अब “सिर्फ एक ड्रिंक” को सौवीं बार ठुकराना भी उसके लिए आसान हो गया है।

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