Shivcharan Gupta death: हरियाणा के सोनीपत में वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय शिवचरण रामरतन गुप्ता के निधन के बाद उनकी बेटियों और वृद्धाश्रम संचालक के बीच हुई बातचीत सामने आई है। शिवचरण ने तड़के करीब साढ़े तीन बजे अंतिम सांस ली। इसके बाद वृद्धाश्रम संचालक ने उनकी तीनों बेटियों को फोन कर पिता के निधन की जानकारी दी।
करीब डेढ़ साल से वृद्धाश्रम में थे
मूल रूप से मुंबई के रहने वाले शिवचरण रामरतन गुप्ता करीब डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी मीना के साथ सोनीपत के वृद्धाश्रम आए थे। दोनों यहीं रहने लगे थे। कुछ समय बाद उनकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद शिवचरण के लिए वृद्धाश्रम ही उनका घर और सहारा बन गया। वृद्धाश्रम संचालक आनंद के मुताबिक, शिवचरण पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी तबीयत को लेकर बेटियों को भी जानकारी दी गई थी।
20 दिन पहले हुई थी बेटियों से बात
आनंद ने बताया कि शिवचरण की तीन बेटियां हैं। इनमें एक नेपाल में रहती हैं, जबकि दूसरी बेटियों के आजमगढ़ समेत अन्य जगहों पर रहने की जानकारी सामने आई है। करीब 20 दिन पहले भी उनकी बेटियों से पिता की तबीयत को लेकर बातचीत हुई थी। इसके बाद भी शिवचरण की देखभाल वृद्धाश्रम में ही होती रही। बीमारी के दौरान उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई।
तड़के साढ़े तीन बजे हुआ निधन
शिवचरण ने तड़के करीब साढ़े तीन बजे वृद्धाश्रम में दम तोड़ दिया। उनके निधन के बाद संचालक आनंद ने सबसे पहले उनकी बेटियों को फोन किया। उन्होंने बेटियों को पिता की मौत की जानकारी देने के साथ अंतिम संस्कार के लिए सोनीपत आने को कहा। इसी दौरान फोन पर बेटियों और संचालक के बीच बातचीत हुई।
बेटियों ने कहा- 'हमारे पास समय नहीं है'
आनंद के मुताबिक, पिता के निधन की सूचना मिलने के बाद बेटियों ने अपनी परिस्थितियों का हवाला दिया। बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके पास समय नहीं है और वे तुरंत सोनीपत नहीं पहुंच सकतीं। इसके बाद अंतिम संस्कार को लेकर भी बातचीत हुई। बेटियों के तत्काल नहीं पहुंच पाने के बाद शिवचरण के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम संचालक और वहां मौजूद लोगों ने संभाली।
पत्नी के निधन के बाद अकेले पड़ गए थे शिवचरण
शिवचरण अपनी पत्नी के साथ वृद्धाश्रम आए थे। पत्नी की मौत के बाद वह अकेले रह गए। इसके बाद वृद्धाश्रम के कर्मचारी और वहां रहने वाले बुजुर्ग ही उनके आसपास मौजूद रहे। बताया जाता है कि बीमारी के दौरान भी वृद्धाश्रम में उनकी देखभाल की जाती थी। करीब डेढ़ साल में यही जगह उनके लिए घर जैसी बन गई थी।
शिवचरण गुप्ता की मौत के बाद बेटियों से हुई बातचीत ने बुजुर्गों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बेटियों की परिस्थितियों और उनका पक्ष भी सामने आना जरूरी है। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि बुजुर्गों को जीवन के अंतिम पड़ाव में सिर्फ देखभाल ही नहीं, बल्कि परिवार के साथ और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।
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