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S&P ग्लोबल का बड़ा अनुमान: FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.6%, महंगाई 5% के पार जा सकती है

by | Jun 24, 2026 | Top News, Trending

S&P India GDP Growth FY27: वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर नया अनुमान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की आर्थिक विकास दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है, जो नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और निवेश गतिविधियां भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती हैं, लेकिन बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितताएं चुनौतियां भी पैदा कर सकती हैं।

GDP ग्रोथ को लेकर क्या है अनुमान

S&P ग्लोबल के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना रह सकता है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में देश की विकास दर 6.6 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। इस वृद्धि में घरेलू खपत, बुनियादी ढांचा निवेश और सेवा क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार के पूंजीगत व्यय और निजी निवेश में बढ़ोतरी भी आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकती है।

महंगाई 5 प्रतिशत के पार जाने की आशंका

रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी चिंता जताई गई है। एजेंसी का मानना है कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति की दर 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है। यदि महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो आम लोगों की क्रय शक्ति पर असर पड़ सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था कई प्रमुख क्षेत्रों में मजबूती दिखा रही है। विनिर्माण, सेवाएं, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश हो रहा है। इसके अलावा, युवा आबादी, बढ़ता उपभोक्ता बाजार और सरकारी सुधार कार्यक्रम भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।

रिजर्व बैंक के सामने बढ़ सकती है चुनौती

यदि महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति को संतुलित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक ओर आर्थिक वृद्धि को बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर महंगाई को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय में नीति निर्माताओं की प्राथमिकता रह सकता है।

वैश्विक परिस्थितियों का भी पड़ेगा असर

दुनिया के कई देशों में आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं। ऐसे हालात में भारत की अर्थव्यवस्था पर बाहरी कारकों का असर पड़ सकता है। हालांकि, मजबूत घरेलू मांग और निवेश के कारण भारत की विकास यात्रा अन्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

निवेशकों और उद्योग जगत की नजर

S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के बाद निवेशकों और उद्योग जगत की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। उद्योग जगत का मानना है कि यदि निवेश और खपत की रफ्तार बनी रहती है तो भारत अपनी विकास गति को बरकरार रख सकता है। साथ ही, महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक के कदम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

S&P ग्लोबल का अनुमान संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में आर्थिक विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और नीति निर्माताओं के लिए अहम होगा।

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