Sri Lanka Per Capita Income: साल 2022 में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करने वाला श्रीलंका अब धीरे-धीरे आर्थिक मजबूती की राह पर लौटता दिखाई दे रहा है। कभी विदेशी मुद्रा की भारी कमी, ईंधन और खाद्य पदार्थों के संकट से जूझने वाला यह देश अब एक नई उपलब्धि हासिल करने में सफल रहा है। विश्व बैंक की ताजा आय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (Per Capita Gross National Income - GNI) के आधार पर भारत से आगे निकल गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि श्रीलंका की कुल अर्थव्यवस्था भारत से बड़ी हो गई है। यह तुलना केवल प्रति व्यक्ति औसत आय के आधार पर की गई है, जो किसी देश के नागरिकों की औसत आय का संकेत देती है।
क्या कहती है वर्ल्ड बैंक की नई रैंकिंग
विश्व बैंक हर वर्ष देशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per capita) के आधार पर अलग-अलग आय वर्गों में बांटता है। हालिया वर्गीकरण में श्रीलंका को फिर से लोअर-मिडिल इनकम (Lower-Middle Income) श्रेणी में रखा गया है। आर्थिक सुधार और आय में बढ़ोतरी के कारण उसकी प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक दर्ज की गई है। भारत भी इसी आय वर्ग में शामिल है, लेकिन औसत प्रति व्यक्ति आय के मामले में श्रीलंका उससे आगे निकल गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में आई स्थिरता और सुधार को दर्शाता है।
2022 में क्यों आया था आर्थिक संकट
साल 2022 श्रीलंका के इतिहास के सबसे कठिन वर्षों में से एक रहा। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया था, जिससे देश आवश्यक वस्तुओं का आयात नहीं कर पा रहा था। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और दवाइयों की भारी कमी हो गई थी। महंगाई तेजी से बढ़ी, बिजली कटौती आम बात बन गई और लोगों को कई-कई घंटे लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। इस संकट के चलते बड़े पैमाने पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए और तत्कालीन राष्ट्रपति को पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद आर्थिक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
कैसे सुधरी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था
आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सहयोग से कई सुधार लागू किए। सरकार ने राजकोषीय अनुशासन पर जोर दिया, कर प्रणाली में बदलाव किए, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए और पर्यटन क्षेत्र को दोबारा गति देने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके अलावा, निर्यात में सुधार और आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से देश की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई। इन प्रयासों का असर अब अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दिखाई देने लगा है।
क्या भारत के लिए चिंता की बात है
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रति व्यक्ति आय के आधार पर किसी देश की पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसका कुल आर्थिक आकार श्रीलंका की तुलना में कई गुना बड़ा है। भारत की विशाल आबादी के कारण प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। इसलिए इस रैंकिंग को कुल आर्थिक क्षमता या विकास का सीधा पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।
प्रति व्यक्ति आय और कुल अर्थव्यवस्था में क्या अंतर है
प्रति व्यक्ति आय का मतलब है कि किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय को उसकी आबादी से विभाजित किया जाए। वहीं, कुल अर्थव्यवस्था (GDP) किसी देश के समग्र आर्थिक उत्पादन और आकार को दर्शाती है। यही कारण है कि कम आबादी वाले देश कई बार प्रति व्यक्ति आय में आगे होते हैं, जबकि बड़ी आबादी वाले देशों की कुल अर्थव्यवस्था उनसे कहीं अधिक बड़ी हो सकती है।
2022 के गहरे आर्थिक संकट से उबरकर श्रीलंका का प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत से आगे निकलना उसकी अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत है। हालांकि, इसे दोनों देशों की समग्र आर्थिक ताकत की तुलना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का आर्थिक आकार, औद्योगिक क्षमता और वैश्विक प्रभाव श्रीलंका की तुलना में कहीं अधिक बड़ा है। फिर भी, श्रीलंका की यह वापसी बताती है कि प्रभावी आर्थिक सुधार और वित्तीय अनुशासन के जरिए गंभीर संकट से भी बाहर निकला जा सकता है।
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