Cow Slaughter Case: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत देते हुए मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें बकरीद समेत किसी भी दिन राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए हाई कोर्ट के आदेश के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी।
हाई कोर्ट के आदेश में 'सुधार' की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के अंतिम पैराग्राफ में, जिसमें पूरे तमिलनाडु में प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी, शुरुआती आधार में "सुधार" की आवश्यकता है। इस मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
राज्य ने हाई कोर्ट के आदेश को कानून के खिलाफ बताया
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मद्रास हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है। राज्य का कहना है कि यह कानून कुछ निर्धारित शर्तों के तहत अनुपयोगी और अधिक उम्र की गायों के वध की अनुमति देता है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अन्य लागू कानून वध की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान नहीं करते। ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश वैधानिक कानून की सीमा से आगे जाकर न्यायिक हस्तक्षेप जैसा है।
बकरीद से पहले हाई कोर्ट ने दिया था आदेश
मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण की पीठ ने 27 मई को बकरीद से पहले यह आदेश पारित किया था। यह फैसला के. सूर्य प्रशांत की जनहित याचिका पर सुनाया गया, जिसमें मांग केवल यह थी कि पशुओं का वध या बलि तय स्थानों पर ही हो। हालांकि, हाई कोर्ट ने इससे आगे बढ़ते हुए राज्य में किसी भी दिन और किसी भी स्थान पर गायों और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दे दिया था।
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