Swami Kailashanand Giri Message: पूज्य आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने देश के युवाओं और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद की संस्कृति और भाषा की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, लेकिन विरोध के दौरान मर्यादित भाषा और सम्मान की भावना बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा युवाओं के नाम दिए गए संदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और प्रत्येक नागरिक के शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक अधिकारों के सम्मान पर जोर दिया गया है।
विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादित भाषा जरूरी
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी राय रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार देता है। विचारों में अंतर होना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन किसी भी मतभेद या विरोध के नाम पर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या उनके परिवार के प्रति सार्वजनिक मंचों पर अशोभनीय टिप्पणी करना भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक परंपराओं और सनातन मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
युवाओं से की संयम और शालीनता की अपील
स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों के पालन से भी होती है। उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने विचारों को मजबूती से रखें, लेकिन भाषा में संयम, सम्मान और शालीनता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि संवाद का स्तर ऊंचा रहे और असहमति भी सम्मानजनक तरीके से व्यक्त की जाए।
अमर्यादित टिप्पणियों की निंदा
स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज ने सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक या सामाजिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलना सही नहीं है। उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्रहित और सामाजिक सौहार्द की भावना के साथ अपने अधिकारों का उपयोग करने की अपील की।
स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज का संदेश लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ नागरिक जिम्मेदारियों पर भी जोर देता है। उन्होंने कहा कि विचारों की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन उसे व्यक्त करने के लिए भाषा की मर्यादा और सम्मान की भावना बनाए रखना आवश्यक है।
ये भी पढ़ें: https://newsindia24x7.tv/bihar-passenger-train-fire/

