Haridwar: सावन के पावन महीने में हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने राष्ट्र कल्याण, विश्व शांति और सनातन धर्म की उन्नति के संकल्प के साथ अपनी विशेष साधना आरंभ कर दी है।
मौन व्रत के साथ शुरू हुई तपस्या
स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने मौन व्रत धारण करते हुए जल और अन्न का त्याग किया है। पूरे सावन मास के दौरान वे प्रतिदिन लगभग 22 घंटे एक ही आसन पर बैठकर भगवान शिव की आराधना, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक करेंगे। इसे अत्यंत कठिन आध्यात्मिक साधनाओं में से एक माना जा रहा है।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
महाराज की इस साधना के दर्शन और आशीर्वाद के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं। दक्षिण काली मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, 'हर-हर महादेव' के जयघोष और शिवभक्ति के वातावरण से गुंजायमान है।
राष्ट्र और मानवता के कल्याण का संकल्प
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह साधना केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज और समस्त मानवता के कल्याण के उद्देश्य से किया जा रहा एक विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान है। सावन के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों के मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की है।
सावन माह में दक्षिण काली मंदिर शिवभक्ति, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
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