Tarun Tejpal rape case conviction: गोवा स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने गुरुवार को तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल को 2013 के रेप मामले में दोषी करार देते हुए गोवा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के बरी करने वाले फैसले को रद्द कर दिया। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तहलका की एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि गोवा के ग्रैंड हयात होटल में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उसके साथ दुष्कर्म किया।
डिवीजन बेंच के न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांदेकर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत तेजपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त किया जाता है और तेजपाल को दोषी ठहराया जाता है। हालांकि, विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है। सजा की अवधि पर फैसला दोपहर 2:30 बजे सुनाया जाएगा। फैसले के तुरंत बाद तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक सप्ताह के लिए आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की।
फैसला सुनाए जाने के समय तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे। उन्होंने अदालत से कहा कि उनकी उम्र अब 62 वर्ष है और वह स्वयं को पीड़ित मानते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने हाईकोर्ट से आठ सप्ताह के लिए आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सके। उन्होंने दलील दी कि घटना को 13 वर्ष बीत चुके हैं, तेजपाल के खिलाफ कोई अन्य एफआईआर या मामला दर्ज नहीं है और वह पहले ही छह महीने जेल में रह चुके हैं।
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की राहत की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तेजपाल पीड़िता के लिए पिता समान थे और उनके खिलाफ कड़ा संदेश जाना चाहिए। मेहता ने कहा कि पीड़िता ने बार-बार मना किया, लेकिन इसके बावजूद तेजपाल ने दो और दिनों तक उससे जबरदस्ती करने की कोशिश की। उन्होंने अदालत से कहा कि समाज को स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि "जब कोई महिला 'ना' कहे तो उसका अर्थ 'ना' ही होता है।"
तरुण तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें एक वर्ष से कम समय में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई 2017 में गोवा की सेशंस कोर्ट में शुरू हुई थी। 2021 में ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि शिकायतकर्ता का व्यवहार वैसा नहीं था जैसा किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता से सामान्य रूप से अपेक्षित माना जाता है। इसके बाद गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। HC में 3 दिन तक चली अंतिम बहस के दौरान दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई—क्या ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन किया था और क्या तेजपाल का माफी मांगने वाला ईमेल इस बात की स्वीकारोक्ति था कि यौन संबंध की घटना हुई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार पर अधिक ध्यान दिया और रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्यों, विशेषकर शिकायत के बाद भेजे गए माफी वाले ईमेल, को नजरअंदाज कर दिया।
वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि घटना के बाद महिला का व्यवहार उसके आरोपों से मेल नहीं खाता। उन्होंने अदालत को बताया कि महिला ने हॉलीवुड अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो के साथ फोटो खिंचवाने के लिए तेजपाल को संदेश भेजा था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि माफी वाला ईमेल दबाव में लिखवाया गया था और इसे यौन उत्पीड़न की स्वैच्छिक स्वीकारोक्ति नहीं माना जा सकता। साथ ही आरोप लगाया कि महिला ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर किताब लिखने के लिए एक लाख रुपये की फेलोशिप हासिल करने के उद्देश्य से यह कहानी गढ़ी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और तेजपाल को दोषी ठहराया।
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