Bihar Rajya Sabha elections 2026: बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का सियासी माहौल गर्म है। एनडीए चार सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है, लेकिन विपक्ष यदि संयुक्त रूप से प्रयास करता है तो एक सीट जीत सकता है। इस बीच आरजेडी ने राज्यसभा चुनाव में अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पांचवीं सीट एनडीए के कब्जे में रहने का दावा कर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम राज्यसभा चुनाव के खेल को पूरी तरह बदल चुके हैं। पांच सीटों में से आरजेडी कोटे के दो सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। आरजेडी अपने दम पर राज्यसभा की कोई सीट जीतने की स्थिति में नहीं है, लेकिन पार्टी ने घोषणा की है कि वह पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह ने कहा, "हम राज्यसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे।" चर्चा है कि तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव में खुद उतर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अध्यक्षता में एलजेपी (आर) के सभी 19 विधायक पटना में बैठक में शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि वे पांचवीं सीट पर एनडीए के उम्मीदवार को जीताने के लिए एकजुट रहेंगे। इससे पहले जेडीयू ने भी दावा किया था कि वे सभी पांच सीटें जीतेंगे। कुल मिलाकर एनडीए के पास क्लीन स्वीप की स्थिति है।
बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। वर्तमान में एनडीए के पास 202 विधायकों की संख्या है जबकि महागठबंधन के पास मात्र 35 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोटों की आवश्यकता होती है। इस आधार पर एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है—दो बीजेपी और दो जेडीयू के खाते में। पांचवीं सीट जीतने के लिए एनडीए को तीन अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। वहीं, महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए छह अतिरिक्त वोट चाहिए। यदि AIMIM और बसपा के विधायक विपक्ष का समर्थन करते हैं, तो महागठबंधन की जीत तय हो सकती है।
आरजेडी के पास केवल 25 विधायक हैं। कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन से कुल संख्या 35 पहुंचती है, जो जीत के लिए छह वोट कम है। इसके बावजूद आरजेडी ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया। एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तर ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद कहा कि एआईएमआईएम इस बार अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है और महागठबंधन इसे समर्थन देगा।
आरजेडी ने संसदीय दल की बैठक में तेजस्वी यादव को विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में अधिकृत किया। यदि तेजस्वी खुद चुनाव में उतरते हैं, तो विपक्ष का समर्थन सुनिश्चित हो सकता है। अन्य आरजेडी नेताओं के नाम पर ऐसा समर्थन नहीं मिलेगा।
चिराग पासवान ने साफ कर दिया है कि पांचवीं सीट एनडीए के कब्जे में रहेगी। हालांकि एनडीए को इसे जीतने के लिए अन्य सहयोगी दलों जैसे जदयू, एलजेपी, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता होगी। पांचवीं सीट पर उम्मीदवार का चयन एनडीए के लिए रणनीतिक अहमियत रखता है।
राज्यसभा चुनाव में एनडीए का दबदबा साफ दिख रहा है, लेकिन विपक्षी रणनीति और तेजस्वी यादव की भूमिका इसे रोचक और महत्वपूर्ण बना रही है। बिहार का यह राज्यसभा चुनाव सियासी समीकरणों और नंबर गेम के लिहाज से बेहद दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है।
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