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ईरानी सड़कों पर आतंक! महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन अब सत्ता और धर्म के टकराव में बदला, जानें क्या हैं बिगड़ती स्थिति के कारण

by | Jan 10, 2026 | दुनिया

Iran Political Crisis: ईरान की राजधानी तेहरान और देश के कई बड़े शहरों में पिछले दो हफ्तों से लगातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। शुरूआत में आर्थिक संकट और महंगाई के विरोध से शुरू हुए ये आंदोलन अब सीधे धार्मिक नेतृत्व और सत्ता के खिलाफ मोड़ ले चुका है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि शुक्रवार रात को राजधानी में प्रदर्शनकारियों ने जमकर बवाल मचाया, और सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया।

प्रदर्शन की वजह और शुरुआती स्वरूप

29 दिसंबर, 2025 को ईरान में रियाल की गिरती कीमत और बढ़ती महंगाई के विरोध में व्यापारियों ने सेंट्रल तेहरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, व्यापारियों ने अपने साथियों से दुकानें बंद करने और प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। 30 दिसंबर को, तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी विरोध में शामिल हो गए। इस आंदोलन ने जल्दी ही आर्थिक मुद्दों को पीछे छोड़ते हुए राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ रंग ले लिया।

हिंसा का नया रूप और राजधानी में बवाल

अगले कुछ दिनों में झड़पें तेज़ हो गईं। देशभर के अस्पतालों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, केवल तेहरान के छह अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश की मौत गोलियों से हुई। इसके अलावा, 14 सेना के जवान भी हिंसा में शहीद हुए। पुलिस ने अब तक 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। तेहरान के अलावा मशहद, कोम, इस्फ़हान, मशिरियेह, कजविन, बुशहर और वज्द शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सड़कों पर आगजनी की और सरकारी संपत्तियों को क्षतिग्रस्त किया।

आर्थिक से राजनीतिक मोड़

प्रदर्शन शुरूआत में महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की गिरावट के विरोध में थे। लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन सीधे सत्ता और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ हो गया। प्रदर्शनकारियों ने बैंकों, सरकारी इमारतों और मस्जिदों पर हमला किया। बीते दिन बासिज IRGC कैंप पर भी हमला किया गया।

अभी तक रिपोर्ट्स के मुताबिक-

• 26 बैंकों को लूटा गया
• 25 मस्जिदों में आग लगी
• 10 सरकारी इमारतें ध्वस्त
• 24 अपार्टमेंट, 48 फायर ट्रक और 42 बसें क्षतिग्रस्त
• कॉलेज और यूनिवर्सिटी बंद

तेहरान के मेयर का बयान

तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने कहा कि राजधानी में बड़े दंगों से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने ईरानी सरकारी टीवी पर कहा,
“एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा है, दो मेडिकल सेंटर और 26 बैंक लूटे गए, 25 मस्जिदों में आग लगी और कानून लागू करने वाली चौकियों तथा बसीज हेडक्वार्टर पर हमला हुआ।” उनके मुताबिक, इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें राजधानी में हुए नुकसान की मरम्मत में जुटी हैं।

इंटरनेट बंद और नियंत्रण की कोशिश

बढ़ती अशांति और हिंसा के कारण, ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। इसका मकसद प्रदर्शनकारियों के आपसी संपर्क और सूचना के प्रसार को रोकना है।

मौतों और घायल हुए लोगों का आंकड़ा

प्रदर्शन अब तक लगभग 5 लाख लोगों को प्रभावित कर चुके हैं। झड़पों में:

• 217 प्रदर्शनकारियों की मौत
• 14 सुरक्षा बल के जवान शहीद
• 2,300+ गिरफ्तार

प्रदर्शन देश के लगभग 400 अलग-अलग स्थानों पर फैल चुके हैं।

हिंसा का नया स्वरूप

हाल के दिनों में प्रदर्शनकारी और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच झड़पें और भी हिंसक हो गई हैं। कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और लूट की घटनाएं हुईं। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सार्वजनिक संपत्तियों पर हमला किया बल्कि कई निजी अपार्टमेंट और फायर ब्रिगेड ट्रक भी क्षतिग्रस्त किए।

नकाबपोश और सशस्त्र प्रदर्शनकारी

2 जनवरी, 2026 को इलम प्रांत की सड़कों पर कुछ अज्ञात नकाबपोश और सशस्त्र लोग दिखाई दिए। यह हिंसा धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रही है। प्रदर्शन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक नेतृत्व और सत्तारूढ़ एजेंसियों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन बन चुका है।

हिंसा के पीछे व्यापक राजनीतिक संदेश

विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल आर्थिक संकट या महंगाई विरोध तक सीमित नहीं है। यह ईरान में सत्तारूढ़ धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व और राजनीतिक असंतोष की गहरी दरार को उजागर करता है।

भविष्य की अनिश्चितता

तेहरान और देश के अन्य शहरों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती जा रही है, हिंसा फैल रही है और सरकार का नियंत्रण कमजोर होता दिख रहा है। सवाल अब यह है कि क्या ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व इस आंदोलन को नियंत्रित कर पाएगा, या यह प्रदर्शन और हिंसा देशभर में व्यापक संकट का रूप ले लेगा?

ईरान में गहरी राजनीतिक अस्थिरता

ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक विद्रोह और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह में बदल चुका है। इंटरनेट बंद, बैंकों, मस्जिदों और सरकारी इमारतों पर हमले, दर्जनों मौतें और सैकड़ों घायल, यह सब संकेत हैं कि ईरान अब गहरी राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

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