Crop Diversification India: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से गेहूं और धान पर अपने लंबे समय से चले आ रहे फोकस का पुनर्मूल्यांकन करने और किसानों को वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के एक नए नीतिगत ढांचे पर विचार करने को कहा। यह टिप्पणी किसान महापंचायत द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने जोर दिया कि देश में फसल विविधता लाने की आवश्यकता अब पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
सीजेआई सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि क्या देश को वर्तमान में उतना ही गेहूं और धान उत्पादन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले से ही कृषि पद्धतियों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि गेहूं और धान से आगे बढ़कर वैकल्पिक फसलों पर ध्यान दिया जाए। अदालत ने विशेष रूप से उत्तरी और मध्य भारत में दालों को गेहूं और धान के विकल्प के रूप में बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पीठ ने यह भी कहा कि दक्षिणी राज्यों में अन्य उपयुक्त फसलों को प्रमुख विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है। इसके लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न विभागों को बेहतर समन्वय और समझ के साथ काम करने की आवश्यकता होगी। अदालत ने फसल विविधीकरण के लिए नीतिगत समर्थन और विभागों के बीच सहयोग को जरूरी बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छोटे पैमाने के किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन मिलना चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि प्रोत्साहित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ऐसा होना चाहिए कि छोटे किसान दालों की खेती कर सकें और उनकी उपज का समय पर उचित मूल्य मिल सके। इसके अलावा पीली मटर की कीमत को इस तरह तय किया जाना चाहिए कि यह स्वदेशी दालों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर न डाले।
याचिका में केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक पीली मटर के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले को चुनौती दी गई। किसान महापंचायत का तर्क है कि इस नीति से घरेलू कीमतें गिर सकती हैं और एमएसपी से नीचे जा सकती हैं, जिससे भारतीय किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों की गंभीरता से समीक्षा करे। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) को कहा कि वे हितधारकों के साथ बैठकें आयोजित करें ताकि वर्तमान नीतिगत ढांचे की समीक्षा हो और किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर दालों की खेती में प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर व्यवस्था बनाई जा सके।
अदालत ने यह भी कहा कि मंत्रालय को एक नई नीति के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने में सक्षम होना चाहिए। बैठक और विचार-विमर्श का विवरण रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि किसानों के हित और देश में फसल विविधता सुनिश्चित की जा सके।
AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…
Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…
ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…
CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…
Kanpur Vineet Minocha Murder Case: कानपुर के फार्मा कारोबारी विनीत मनोचा की हत्या की जांच…
IIT Bombay Sahil Wakode Case: IIT बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद…